मोहन सरकार के आत्म समर्पण से जन भावनाएं आहत
रीवा । सरदार सरोवर बांध प्रोजेक्ट विवाद में मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने गुजरात और केन्द्र सरकार के दवाब में मुआवजे की 7669 करोड़ रुपए की बड़ी राशि पर अपना दावा छोड़कर भारी भरकम कर्ज और आर्थिक तंगी से जूझ रही प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को और अधिक घाटे में डाला है। समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि सरदार सरोवर बांध का शिलान्यास सन 1961 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था। कालांतर में इस बांध की ऊचाई को बढ़ाए जाने से मध्यप्रदेश को सबसे अधिक समस्याओं से जूझना पड़ा है। बड़े पैमाने पर जल जंगल जमीन और जन डूब क्षेत्र में आने से उसकी भरपाई आज तक संभव नहीं हो पाई। मध्यपदेश के लाखों लोगों का विस्थापन किसी भयावह त्रासदी से कम नहीं है। ऐसे लोगों को आज तक सही राहत नहीं मिल पाई है। पहले बांध की ऊचाई 80.3 मीटर तय थी जिसे बढ़ाकर 138.68 मीटर ले जाया गया। इससे विस्थापन की समस्या और विकराल हुई। इधर मध्यप्रदेश सरकार ने गुजरात से वसूली जाने वाली मुआवजा राशि 7669 करोड़ रुपए को नहीं लेने का निर्णय लेकर प्रदेश की जनता को और अधिक आर्थिक तंगी में डाल दिया है। मध्यप्रदेश को बांध निर्माण कार्य में अब लगभग 1500 करोड़ की रुपए की जगह केवल 231. 80 करोड रुपए गुजरात को देने पड़ेंगे। दरअसल निर्माण कार्य में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी खर्च 31.98 प्रतिशत से घटाकर 16.7 प्रतिशत किए जाने से गुजरात को पहले की तुलना में कम राशि देनी होगी। यह काफी तकलीफदेह बात है कि 7669 करोड़ रुपए का मुआवजा दावा छोड़कर 1268 करोड़ रुपए की बचत की बात प्रचारित करके जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। श्री खरे ने कहा कि सरदार सरोवर बांध का सर्वाधिक लाभ गुजरात को मिला और मध्यप्रदेश लंबे समय तक उसकी कीमत चुकाता रहेगा। गुजरात की तुलना में मध्यप्रदेश अभी काफी पीछे है। ऐसी स्थिति में मध्य प्रदेश को दबाकर गुजरात को अनुचित लाभ दिया जाना सरासर गलत है। मोहन सरकार के आत्म समर्पण से जन भावनाएं आहत हुई हैं।






