मप्र में साल भर में 50000 से भी अधिक हताहत संख्या किसी युद्ध विभीषिका से कम नहीं
वाहनों की मनमानी रफ्तार सबसे अधिक जानलेवा
रीवा । सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण नहीं हो पाना गंभीर चिंता का विषय है। रीवा जिला में भी सड़कें आए दिन रक्तरंजित हो रही हैं। मध्य प्रदेश में सन 2024 के मुक़ाबले सन 2025 में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा 17 प्रतिशत बढ़ गया। सड़क हादसों से बड़े पैमाने पर हो रही जन धन हानि भारी चिंता के साथ कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि पीटीआरआई के आंकड़ों के मुताबिक अच्छी और सीधी सड़कों पर सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। 80% दुर्घटनाओं की वजह वाहनों की तेज रफ्तार है।
मप्र पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में कुल 58183 सड़क दुर्घटनाओं में 15976 लोगों की मौतें दर्ज हुई हैं। सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 35 वर्ष के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। वाहन चालकों के नशे की हालत, मोबाइल पर बात , सीट बेल्ट और हेलमेट का उपयोग नहीं करने से भी दुर्घटना मामले बढ़ जाते हैं। श्री खरे ने बताया कि बहुत से मामले पुलिस थाने तक नहीं पहुंच पाते हैं। कुछ मामलों में लोग पुलिस थाना का चक्कर लगाने के बजाय आपसी समझौता कर लेते हैं। यह मामले दर्ज नहीं हो पाते हैं। ऐसे मामले भी हैं जिसमें दुर्घटना करने वाले वाहनों का पता नहीं चल पाता है। यह संख्या भी कम नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सड़के अच्छी और सूनसान है वहां तेज रफ्तार के वाहनों से सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि देखने में आ रही है।
लोकतंत्र सेनानी श्री खरे ने कहा कि यह भारी विडम्बना कि सड़क दुर्घटनाएं अत्यंत संवेदनशील मामला होते हुए भी राष्ट्रीय चिंता का विषय नहीं बन पाई हैं। बड़ी दुर्घटनाओं पर सरकार के द्वारा शोक व्यक्त करने और मुआवजा देने के बाद उसे भुला दिया जाता है। देश भर में सड़क दुघर्टनाओं में हर वर्ष लाखों लोग मरते हैं। इससे अधिक संख्या में लोग घायल होते हैं। इनमें से गंभीर रूप से घायल बहुत से लोगों का जीवन उपचार होने पर बच जाता है लेकिन वे शारीरिक रूप से आजीवन असमर्थ रहते हैं। इन सड़क हादसों के चलते कई लाख परिवारों में अपने लोगों को हमेशा के लिए खो देने या फिर शारीरिक रूप से असमर्थ होने का दुख बना रहता है वहीं ऐसे परिवार आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट जाते हैं।
श्री खरे ने कहा कि विकास के नाम पर अच्छी सड़कों का दावा बढ़ चढ़कर किया जाता है वहीं सड़क दुघर्टनाओं को महज़ त्रासदी के रूप में देखा है। अच्छी सड़कों से आवागमन सुचारू रूप से होता है। यात्रा में समय की बचत भी होती है। यातायात नियमों के मापदंडों को कभी भी नज़र अंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पहले सड़क दुर्घटनाओं से सावधान करने के लिए बड़े बड़े संकेतक बोर्ड लगाए जाते थे। दुर्घटना से देर भली , धीमें चलें, सावधान अंधा मोड़, रास्ता संकरा, स्कूल है, पानी होने पर पुलिया पार नहीं करें आदि बातें लिखी होती थीं। सड़क दुर्घटनाओं को रोकना भी शासन का काम है। इसकी रोकथाम की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाना चहिए। इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। ऐसा नहीं कर पाना सरकार की अक्षमता और विफलता है।







