झारखंड में पांच ‘योद्धा’ इस बार चुनावी पिच से बाहर

दस सांसदों और दस विधायकों की किस्मत दांव पर

रामनरेश

रांची। झारखंड में इस बार लोकसभा का चुनाव पिछले चुनावों से कई मायनों में अलग है। यह पहली बार है, जब राज्य की 14 लोकसभा सीटों पर 20 निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की किस्मत दांव पर लगी है। इनमें नौ लोकसभा सांसद, एक राज्यसभा सांसद और 10 विधायक शामिल हैं।
मौजूदा लोकसभा सांसदों में निशिकांत दुबे गोड्डा सीट से लगातार चौथी बार संसद पहुंचने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि पलामू से बीडी राम, जमशेदपुर से विद्युत वरण महतो और राजमहल से विजय हांसदा के सामने हैट्रिक लगाने का मौका है। कोडरमा से अन्नपूर्णा देवी, खूंटी से अर्जुन मुंडा, गिरिडीह से चंद्रप्रकाश चौधरी और सिंहभूम से गीता कोड़ा लगातार दूसरी बार संसद पहुंचने के लिए मैदान में हैं।
राज्यसभा के सांसद समीर उरांव इस बार लोहरदगा से लोकसभा पहुंचने की दावेदारी कर रहे हैं। राज्य के नौ विधायकों को बड़ी पार्टियों ने इस बार लोकसभा की जंग में उतारा है। इनमें हजारीबाग सीट पर भाजपा के मनीष जायसवाल और कांग्रेस के जयप्रकाश भाई पटेल, गोड्डा सीट पर कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह, धनबाद में भाजपा के ढुल्लू महतो, सिंहभूम में झामुमो की जोबा मांझी, गिरिडीह में झामुमो के मथुरा महतो, कोडरमा में सीपीआई एमएल के विनोद सिंह, दुमका में भाजपा की सीता सोरेन और झामुमो के नलिन सोरेन शामिल हैं।
इनके अलावा झामुमो के एक विधायक लोबिन हेंब्रम राजमहल सीट से निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर चुके हैं। 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने वाले पांच ‘योद्धाओं’ को इस बार चुनावी पिच पर बैटिंग का मौका नहीं मिल पाया है। इनमें पिछले चुनाव में राज्य में सबसे ज्यादा मतों से जीत दर्ज करने वाले धनबाद के सांसद पीएन सिंह भी शामिल हैं। इनके अलावा जिन सांसदों को इस बार चुनाव मैदान से बाहर होना पड़ा है, उनमें हजारीबाग से जयंत सिन्हा, चतरा से सुनील सिंह, दुमका से सुनील सोरेन और लोहरदगा से सुदर्शन भगत शामिल हैं।

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