23 अक्टूबर को पुलिस दमन के खिलाफ दिल्ली में उतरेंगे देशभर के किसान!

किसान संघर्ष समिति की 346वीं किसान पंचायत संपन्न

 

 

26 नवंबर को देशभर में सौ स्थानों पर बड़े प्रदर्शन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

किसान आंदोलन निर्णायक दौर में पहुंच गया है!

 

डॉ. सुनीलम

किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 346 वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। पंचायत में विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने एमएसपी@सी2+50% पर खरीद की कानूनी गारंटी और संपूर्ण कर्जामुक्ति, भूमि अधिग्रहण पर रोक लगाने, किसानों के आंदोलन की वर्तमान स्थिति, संभावित कार्यक्रम, पक्के मोर्चे का ऐलान, ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा – एस आई आर रद्द करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन, जे़न जी आंदोलन, डबल इंजन सरकारों की किसान मजदूर और जन विरोधी नीतियों पर चर्चा की।
किसान पंचायत को महाराष्ट्र से किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो सुशीला ताई मोराळे, पंजाब किसान यूनियन की राज्य कमेटी सदस्य जसबीर कौर, रीवा म प्र से किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव एड शिवसिंह, प्रदेश अध्यक्ष एड आराधना भार्गव, कर्नाटक जनशक्ति संगठन के अध्यक्ष नूर श्रीधर, छत्तीसगढ़ से भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष तेजराज विद्रोही, महाराष्ट्र से शेतकरी विकास मंच के अध्यक्ष हुसैन खान, गुजरात से किसान नेता भरतसिंह झाला, राजस्थान से सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मीणा, उड़ीसा से इंसाफ के नरेंद्र मोहंती, रीवा से कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंखू, इंदौर से मालवा निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, भोपाल से अ भा कि सभा के प्रदेश महासचिव जनक राठौर, सागर से भा कि श्र जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप ठाकुर, हरदा से राष्ट्रीय किसान मोर्चा के रामनिवास जाट आदि किसान नेताओं ने संबोधित किया।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा ने देशभर में लंबित मांगों को लेकर दिल्ली सहित देश भर में राष्ट्रव्यापी बड़े कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। 23 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे – एस आई आर रद्द करने, 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वापस जोड़ने, चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया बदलने तथा दिल्ली पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों पर किए जा रहे दमन के खिलाफ देश भर में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा प्रदर्शन किए जाएंगे।
डॉ सुनीलम ने कहा कि किसान आंदोलन देश में निर्णायक दौर में पहुंच गया है।
प्रो सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि पूरा महाराष्ट्र सुखे की चपेट में हैं। सरकार तमाम दावे कर रही है लेकिन उसका लाभ अभी तक किसी को नहीं मिल पाया है।
मध्य प्रदेश के रीवा से एड शिव सिंह ने बताया कि MSP और अन्य किसान मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए गए हैं। नवंबर में प्रस्तावित राष्ट्रीय आंदोलन के तहत रीवा में पक्का मोर्चा लगाने की तैयारी की जा रही है।
नूर श्रीधर ने कहा कि राज्य में दलितों, आदिवासियों और गरीब किसानों की जमीन के अधिकारों का सवाल गंभीर है। बिना कानूनी पट्टे के सरकारी जमीन पर खेती करने वाले किसानों को अधिकार दिलाने, दलित-आदिवासियों की आवंटित जमीन वापस दिलाने तथा भूमि अधिग्रहण और भूमि सुधार कानूनों में किए गए बदलावों के खिलाफ व्यापक आंदोलन की जरूरत है।
पंजाब से जसबीर कौर नट ने कहा कि MSP में मामूली वृद्धि, किसानों का कर्ज, भूमि अधिग्रहण और पानी के बंटवारे जैसे मुद्दे गंभीर हैं। उन्होंने किसान संगठनों की एकता को सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि किसानों की जमीन और शिक्षा संस्थानों पर बढ़ते हस्तक्षेप के खिलाफ संघर्ष तेज किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ से तेजराम विद्रोही ने कहा कि किसानों की कर्जमाफी नहीं होने से उनकी जमीनों की कुर्की और नीलामी की नौबत आ रही है। गन्ना किसानों के आंदोलन, बीज उत्पादक किसानों के बकाया भुगतान और धान का उचित मूल्य दिलाने के लिए संघर्ष जारी है। उन्होंने किसानों के सभी आंदोलनों को संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आंदोलन से जोड़ने पर जोर दिया।
राजस्थान से कैलाश मीणा ने किसानों की कर्जमाफी, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को सहायता, भूमि अधिग्रहण कानून के क्रियान्वयन और MSP की कानूनी गारंटी की मांग उठाई। उन्होंने अरावली में खनन, जलस्रोतों के विनाश और किसानों की आजीविका पर मंडराते खतरे के खिलाफ सभी जन संगठनों से एकजुट होने की अपील की।

नरेंद्र मोहंती ने बताया कि 30 अक्टूबर को जन आंदोलनों के कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, वरिष्ठ नागरिकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को साथ लेकर नियमगिरि में खनन के प्रस्ताव के विरोध में आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वेदांता कंपनी द्वारा नियमगिरि में खनन शुरू करने की कोशिश से आदिवासी समुदायों के अधिकारों, पर्यावरण और पारंपरिक आजीविका पर संकट पैदा हो सकता है।

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