यह पोस्ट भारतीय सेना की निर्णायक सैन्य कार्रवाई- ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ से कुछ ही दिन पहले शेयर की गई है। इस पोस्ट में एक तस्वीर भी शामिल थी, जिसके कैप्शन में लिखा था, ’22 मिनट का घटनाक्रम और फिर उनकी कमान ध्वस्त हो गई।
सेना ने इससे पहले रविवार को भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि ‘सटीक लक्ष्य भेदना. आतंकवाद पर निशाना. स्थायी परिणाम.’
इस पोस्ट के साथ ‘9 आतंकी ठिकाने तबाह’ और ‘भारत नहीं भूलता’ शीर्षक वाली एक तस्वीर भी थी, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए हमलों के दौरान एक कमांड सेंटर को दर्शाया गया था. बता दें कि पहलगाम का जख्म और न्याय की हुंकार यह पूरा घटनाक्रम 22 अप्रैल 2025 की उस काली तारीख से जुड़ा है, जब पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने धर्म पूछकर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी. इस घाव को भारत भूला नहीं है।
सेना ने चेतावनी देते हुए कहा था कि जब इंसानियत की हदें पार की जाती हैं तो जवाब निर्णायक होता है। इस हमले के जवाब में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 6 और 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इसके तहत पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर में स्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के नौ आतंकी कैंपों को मिट्टी में मिला दिया गया था।
यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का प्रमाण था। सेना ने अपने पोस्ट में ‘ऑपरेशन महादेव’ का भी जिक्र किया, जिसके तहत 93 दिनों तक दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाकर पहलगाम हमले के मुख्य दोषियों को ठिकाने लगाया गया था।








