बिहार में हर साल 10 लाख में औसतन 2.65 फीसद लोगों की मौतें बिजली गिरने से

अभिजीत / रामनरेश

पटना । भारत मे प्राकृतिक आपदाओं में आठ हजार 60 लोगों की मौतें हुईं। इनमें सबसे अधिक दो हजार 887 मौतें बिजली गिरने की घटनाओं में हुईं।ये मौतें प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली मौतों का 35.8 फीसदी हैं। बिजली गिरने से सबसे अधिक होनेवाली मौतें मध्य प्रदेश में दूसरा बिहार और तीसरा महाराष्ट्र राज्य के नाम दर्ज है।

बिहार में बिजली गिरने से होने वाले नुकसान का पीक सीजन मई से सितंबर के बीच है.वहीं मौतों और लोगों के घायल होने की सबसे अधिक घटनाएं जून-जुलाई में दर्ज की गईं। इन दो महीने में ही कुल मौतों का 58.8 फीसद और घायल होने की 59.43 फीसदी घटनाएं दर्ज की गईं।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक प्राकृतिक आपदाओं में आठ हजार 60 लोगों की मौतें हुईं। इनमें सबसे अधिक दो हजार 887 मौतें बिजली गिरने की घटनाओं में हुईं। ये मौतें प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली मौतों का 35.8 फीसदी हैं। बिजली गिरने से सबसे अधिक 496 मौतें मध्य प्रदेश में हुईं।इस सूची में दूसरा नाम बिहार का है,जहां 329 मौतें दर्ज की गईं।वहीं महाराष्ट्र में 239 मौतें दर्ज की गईं।

रिपोर्ट बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं में होने वाली मौतों में बिजली गिरने से होने वाली मौतों की संख्या सबसे अधिक है।आंकड़ों में देखें तो प्राकृतिक आपदा से तमिलनाडु में हुईं 93 मौतों में से 89 मौतें बिजली गिरने से हुई थीं। वहीं छत्तीसगढ़ में 248 में से 210 मौतें,पश्चिम बंगाल की 195 में से 161 और कर्नाटक की 140 में से 96 मौतें बिजली गिरने की घटनाओं में हुईं।

बिजली गिरने से बिहार में होने वाली मौतों को लेकर एनआईटी पटना के डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन के आनंद शंकर, भारतीय मौसम विभाग के पटना केंद्र के आशीष कुमार और विवेक सिन्हा ने एक अध्ययन किया है।यह अध्ययन जर्नल ऑफ अर्थ साइंस के अप्रैल 2024 अंक में प्रकाशित हुआ है।

इस अध्ययन में बिहार सरकार के डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। ये आंकड़े 2017 से 2022 के बीच के हैं।इन आकंड़ों के मुताबिक इस दौरान बिहार में हर साल 271 मौतें और लोगों के घायल होने की करीब 58 घटनाएं हुईं। बिहार में हर साल 10 लाख लोगों में औसतन 2.65 फीसद लोगों की मौतें बिजली गिरने की घटनाओं में हुई।यह राष्ट्रीय औसत 2.55 मौतों से भी अधिक है।

अध्ययन के मुताबिक बिहार में बिजली गिरने से होने वाले नुकसान का पीक सीजन मई से सितंबर के बीच है।वहीं मौतों और लोगों के घायल होने की सबसे अधिक घटनाएं जून-जुलाई में दर्ज की गईं। इन दो महीने में ही कुल मौतों का 58.8 फीसद और घायल होने की 59.43 फीसदी घटनाएं दर्ज की गईं।इसमें भी खास बात यह रही कि मौत और घायल होने की 76.8 फीसदी घटनाएं दोपहर साढ़े 12 और शाम साढ़े छह बजे के बीच हुईं।

बिहार में बिजली गिरने की सर्वाधिक घटनाएं दक्षिणी और पूर्वी हिस्से में हुईं। अधिकांश घटनाएं ग्रामीण इलाकों में हुईं। बिहार में 11 से 15 साल के लड़के और 41 से 45 साल के पुरुष इसके सबसे बड़े शिकार हैं। इस अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया है कि बिजली गिरने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए लोगों में और जागरूकता लाने की जरूरत है। विशेषज्ञ अधिक से अधिक लाइटनिंग रॉड लगाने और जन जागरूकता फैलाने पर जोर देते हैं।

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