बेशर्मी पर उतरे कृषि मंत्री भी, किसानों की आय बता रहे आठ गुनी!

लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं सीमांत किसान, ठेके पर दे रहे अपनी जमीन
कम आय ही है किसानों के बेटों का खेती से मोह भंग होने का कारण

 

चरण सिंह 

बेशर्मी की भी हद है। किसान दोगुनी आय का रोना रो रहे हैं कि कृषि मंत्री शिवराज चौहान किसानों की आय दोगुनी नहीं बल्कि आठ गुनी होने का दावा कर रहे हैं। किसी रैली में नहीं बल्कि संसद में। शिवराज चौहान को सदन को यह भी तो बताना चाहिए कि किसानों की आय आठ गुनी कैसे हो गई है।

 

शिवराज चौहान को तो यह भी नहीं पता नहीं है कि सीमांत किसानों टॉप बेचारे लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। किसानों की स्थिति तो यह है कि यदि किसान परिवार में बाहर से किसी तरह की कोई इनकम न हो तो किसान परिवार का गुजारा भी नहीं हो सकता है। बड़ा प्रश्न यह है कि यदि  किसानों की आय आठ गुनी हो गई है तो फिर किसान के बेटे खेती क्यों नहीं कर रहे हैं ? किसान अपनी जमीन ठेके पर क्यों दे रहे हैं ? जमीनी हकीकत तो यह है कि सरकार लगातार किसानों की भावनाओं से खेल रही है। जहां पूंजीपतियों के अरबों रुपए के कर्जे माफ़ कर दिए जा रहे हैं वहीं किसानों के हजारों रूपए के कर्जे पर जेल में ठूंस दिया जा रहा है।

किसानों की आय तो खत्म करने की करने की तैयारी इस सरकार ने कर दी है।अमेरिका से ट्रेड डील में भारत का कृषि बाजार खोलकर किसानों को कंगाल बनाने की तैयारी यह सरकार कर रही है। सोचिये जब जीरो प्रतिशत टैरिफ पर जब अमेरिका के किसानों का उत्पाद आएगा तो फिर भारत के किसानों का उत्पाद कोई क्यों ख़रीदेगा ? किसानों को बर्बाद करने पर आमादा इस सरकार ने ही तो किसानों की जमीन पूंजीपतियों के हवाले करने की तैयारी तीन कानून लाकर कर दी थी। वह तो किसानों ने डेढ़ साल तक आंदोलन कर सरकार को कानून वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया। यह सरकार तो किसानों को आतंकवादी, नक्सली, नकली किसान न जाने क्या क्या कह रही थी।
दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए किसानों की आय आठ गुना होने की बात कही। राय ने पूछा था कि सरकार बताए कि किसानों की आय वास्तव में कब दोगुनी होगी और उनके खुदकुशी के मामले कब शून्य पर आएंगे? इसपर चौहान ने कहा कि देश में कई किसानों की आय दोगुनी हुई है। मैं जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि केवल दोगुनी नहीं, बल्कि कई किसानों की आमदनी तिगुनी और चौगुनी भी हुई है. और कई की तो आठ गुनी भी हुई है।

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