लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय प्रवासी शोधपीठ” की स्थापना

लक्ष्मीबाई महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल के मध्य संपन्न समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत महाविद्यालय में “गिरमिटिया अध्ययन एवं भारतीय प्रवासी शोधपीठ ” की स्थापना की गई है। यह शोधपीठ प्रारंभिक रूप से पाँच वर्षों (24 जून 2026 से 23 जून 2031) के लिए स्थापित की गई है। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. लता शर्मा ने कहा कि यह शोधपीठ भारतीय प्रवासी समुदाय, विशेषकर गिरमिटिया समाज के इतिहास, संस्कृति, विरासत और समकालीन चुनौतियों के अध्ययन एवं अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगी। यह पहल भारतीयता के वैश्विक आयामों को समझने तथा भारत और विश्व के भारतीय समुदायों के मध्य सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संबंधों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ग्लोबल गिरमिटिया काउन्सिल के संस्थापक श्रीमान अरविन्द पाण्डेय जी ने इस अनुबन्ध को गिरमिटिया समाज के अध्ययन व शोध की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए महाविद्यालय के नवाचार व शोध के प्रति सकारात्मक दृष्टि की भूरी भूरी प्रशंसा की साथ ही इस संकल्प को अभिव्यक्त किया की आने वाले कुछ दिनों में ही इस चेयर के मूलभूत संसाधनों को सशक्त करते हुए,शोध, नवाचार एवं इन्टर्नशिप की गतिविधीयों को आगे बढ़ाया जायेगा । इस शोधपीठ के निदेशक एवं समन्वयक डॉ. सुनील कुमार मिश्र ने बताया कि शोधपीठ के माध्यम से गिरमिटिया एवं भारतीय प्रवासी समुदायों पर बहु-विषयक अनुसंधान, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों,व्याख्यानमालाओं, प्रकाशनों, शोध परियोजनाओं तथा अभिलेखीकरण एवं डिजिटल रिपॉजिटरी के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अध्ययन, शोध एवं आदान-प्रदान के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

शोधपीठ के अन्य सदस्यों में श्रीमान अभिषेक भास्कर(अंग्रेजी विभाग), डॉ. विनय कुमार मिश्र( संगीत विभाग) सुश्री भावना सक्सेना (सहायक निदेशक, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार), श्री प्रांजल पाण्डेय (संस्थापक सदस्य, ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल) तथा डॉ. प्रमिला (विशेष आमंत्रित सदस्य) शामिल हैं। इस शोधपीठ का उद्देश्य भारत एवं विदेशों के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों के साथ सहयोगात्मक शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देगी तथा गिरमिटिया विरासत के संरक्षण एवं प्रलेखन की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य करना। लक्ष्मीबाई महाविद्यालय एवं ग्लोबल गिरमिटिया काउंसिल ने इस पहल को भारतीय प्रवासी अध्ययन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि यह शोधपीठ भारत और विश्व के भारतीय मूल के समुदायों के बीच ज्ञान, संस्कृति और अनुसंधान के नए सेतु स्थापित करेगी।

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