सिमट रही वंशवाद की राजनीति, हाशिये पर परिवारवादी पार्टियां 

खुद अपनी सीट हार गए तमिलनाडु में एमके स्टालिन और प. बंगाल में ममता बनर्जी, अगला टारगेट उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव

चरण सिंह 

तमिलनाडु में डीएमके और प. बंगाल में टीएमसी की हार से जहां एक ओर एमके स्टालिन और ममता बनर्जी हाशिए पर पहुंच गए वहीं वंशवाद की राजनीति के खिलाफ एक बड़ा संदेश गया है। दिलचस्प बात तो यह है कि जनता ने इन दोनों दिग्गजों को हरा दिया है। कहना गलत न होगा कि क्षेत्रीय दलों में संघर्ष के घोर अभाव और वंशवाद को बढ़ावा देने की प्रवृति का फायदा बीजेपी उठा रही है। तमिलनाडु में डीएमके और प. बंगाल में टीएमसी को धराशायी करने के बाद बीजेपी का टारगेट अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी है।

दरअसल कांग्रेस समेत विभिन्न क्षेत्रीय दलों में वंशवाद का बोलबाला रहा है। वंशवाद बीजेपी में भी है पर यहां पर नेतृत्व अभी वंशवाद से बचा हुआ है। क्षेत्रीय दलों में पार्टियों पर एक ही परिवार का कब्ज़ा है। इन पार्टियों में एक ही परिवार की चलती है। कार्यकर्ता को नेता नहीं बनने दिया जाता है। भले ही लम्बे समय तक इन पार्टियों का देश की राजनीति पर दबदबा रहा हो पर आज की तारीख में परिवारवादी पार्टियां सिमट रही हैं। हरियाणा में चौधरी देवीलाल, भजन लाल और बंसीलाल  परिवार सिमट रहा है।
ओमप्रकाश चौटाला के दोनों बेटे अजय चौटाला, अभय चौटाला के साथ ही पोते दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला हाशिये पर हैं। भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई का भी यही हाल है। बंसीलाल का परिवार भी लगभग अपना वजूद खो चुका है। ऐसे ही बिहार में लालू यादव के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव की हालत पतली है। चिराग पासवान, जीतन राम मांझी भले ही एनडीए सरकार में हो पर उनकी कुछ खास नहीं चल रही है। महाराष्ट्र में बाला साहेब के बेटे उद्धव ठाकरे भतीजे राज ठाकरे का वजूद खत्म होने की ओर है। शरद पवार का परिवार भी हाशिये पर है।
ऐसे ही उत्तर प्रदेश में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को जयंत चौधरी संभाल नहीं पा रहे हैं। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी तो बना दिया है पर उनको खुलकर खेलने का मौका नहीं दे रही हैं। किसी समय आग उगलने वाली मायावती चुप्पी साधे बैठी हैं। ऐसी ही मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव के लिए भी 2027 के विधानसभा चुनाव में दिक्कत पैदा होने वाली है। अखिलेश यादव मैनेज की राजनीति कर रहे हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी होने के बावजूद सपा आंदोलनों से दूरी बनाकर चल रही है। आज कल अखिलेश यादव समाजवाद को भूलकर पीडीए का राग अलापते दिखाई दे रहे हैं।
देश में परिवारवादियों दलों में से जम्मू जम्मू कश्मीर में उमर अब्दुल्ला और झारखंड में हेमंत सोरेन ही मुख्यमंत्री हैं जबकि एक समय महाराष्ट्र में शरद पवार, हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला, पंजाब में प्रकाश सिंह बादल, उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव, जम्मू कश्मीर में फारुख अब्दुल्ला, झारखंड में सिबु सोरेन मुख्यमंत्री हुआ करते करते थे।
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