देवा पारधी हिरासत मौत केस: सुप्रीम कोर्ट के दबाव में CBI की कार्रवाई, दोनों फरार पुलिस अधिकारी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के गुना जिले में 14 जुलाई 2024 को हुई 25 वर्षीय आदिवासी युवक देवा पारधी की पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत का मामला देशभर में सुर्खियां बटोर चुका है। यह घटना देवा की शादी के ठीक एक दिन पहले हुई, जब म्याना थाना पुलिस ने चोरी के एक मामले की पूछताछ के बहाने उन्हें और उनके चाचा को हिरासत में लिया। शाम को परिवार को सूचना मिली कि देवा की मौत हो गई है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस की मारपीट से उनकी मौत हुई। इस घटना के बाद पारधी समुदाय की महिलाओं ने अस्पताल में हंगामा किया, देवा की चाची और होने वाली दुल्हन ने आत्मदाह का प्रयास किया, तथा कलेक्ट्रेट पर अर्धनग्न प्रदर्शन भी हुआ।
देवा की मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग की गई। कोर्ट ने 15 मई 2025 को जांच सीबीआई को सौंप दी, लेकिन गिरफ्तारियां न होने पर अवमानना याचिका दायर हुई। सुप्रीम कोर्ट ने 23, 25 और 26 सितंबर 2025 को कई सुनवाइयों में सीबीआई और राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। 26 सितंबर को जस्टिस नागरत्ना की बेंच ने दोनों फरार अधिकारियों—तत्कालीन TI संजीत सिंह मावई और SI उत्तम सिंह कुशवाह—को 8 अक्टूबर तक गिरफ्तार करने का सख्त निर्देश दिया, अन्यथा अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा, “आप उन्हें बर्खास्त क्यों नहीं कर देते? वे सामने आ जाएंगे।”
गिरफ्तारियों का विवरण
सुप्रीम कोर्ट के दबाव में सीबीआई ने तत्काल कार्रवाई की:

SI उत्तम सिंह: 27 सितंबर 2025 को CBI कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, जहां सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी कोर्ट की फटकार के ठीक अगले दिन हुई।
TI संजीत सिंह मावई: 29 सितंबर 2025 (रविवार) को गुना पुलिस ने शिवपुरी के बदरवास इलाके से उन्हें गिरफ्तार किया और सीबीआई को सौंप दिया।

ये गिरफ्तारियां सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के कारण ही संभव हुईं, जैसा कि आज की सुनवाई में कोर्ट ने स्वयं स्वीकार किया।
आज (8 अक्टूबर 2025) की सुप्रीम कोर्ट सुनवाई
दोनों गिरफ्तारियों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार को फिर फटकार लगाई। जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस महादेवन की बेंच ने पूछा कि 15 मई के गिरफ्तारी आदेश का पालन करने में इतनी देरी क्यों हुई? कोर्ट ने कहा कि आदेश लागू कराने के लिए अवमानना कार्रवाई करनी पड़ सकती है। सीबीआई को 6 नवंबर तक इस चूक पर हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
सुनवाई में याचिकाकर्ता (देवा की मां) की वकील ने बताया कि चश्मदीद गवाह (देवा का चाचा) के खिलाफ 10 नए मुकदमे दर्ज किए गए हैं और उन्हें 7 मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उन्हें परिवार से फोन पर बात करने के लिए भी कोर्ट आदेश की जरूरत पड़ रही है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, “यही रवैया है!” और गवाह को परिवार से फोन पर बात करने की सुविधा देने का आदेश दिया। राज्य सरकार को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा गया। अगली सुनवाई 6 नवंबर 2025 को होगी।
यह मामला पुलिस हिरासत में मौतों के खिलाफ न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है, जहां सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप ही कार्रवाई का आधार बना।

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