US-ईरान सीजफायर पर पाकिस्तान में उठी नोबेल की मांग, फारूक अब्दुल्ला बोले, ‘इससे भी बड़ा पुरस्कार…’

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की असेंबली में पीएमएल-एन के एक विधायक ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने वाला प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान के नेतृत्व ने प्रभावी कूटनीति का प्रदर्शन किया है। इस पर अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है।

पूर्व सीएम ने कहा, “कोई नोबेल पुरस्कार के लिए काम करता है तो कोई इंसानियत के लिए. जो लोग नोबेल पुरस्कार की मांग करते हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. इससे भी बड़ा एक पुरस्कार है और वह है। इंसानियत की सेवा. नोबेल प्राइज से ज्यादा जरूरी जंग खत्म करना है. नोबेल प्राइज से ज्यादा बड़ी चीज इंसानियत है। ये इंसानियत है जो कष्ट झेल रही है. ये इंसानियत है जिसे बचाया जाना चाहिए।

 

अल्लाह करे कि जंग आगे भी बंद हो- फारूक अब्दुल्ला

 

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “अल्लाह का शुक्र करिए कि जंग बंद हो गई है. अल्लाह करे कि जंग आगे भी बंद हो. अमन आए दुनिया में और हम सब इसका फायदा उठा सकें।

 

अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक बैठक

 

बता दें कि पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार (11 अप्रैल) को अहम बैठक होनी है। अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक मीटिंग से पहले इस्लामाबाद को पूरी तरह अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। इतना ही नहीं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री आवास और संसद जैसे इस्लामाबाद के संवेदनशील इलाके को सील कर दिया गया है. एक तरफ अमेरिकी डेलीगेशन इस्लामाबाद पहुंचने लगा है तो दूसरी तरफ ईरान के रुख ने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। लेबनान में सीजफायर की मांग पर अड़े ईरान के कड़े रुख के बाद महाबैठक पर सस्पेंस गहराने लगा है। लेबनान में सीजफायर पर बातचीत के लिए ट्रंप, नेतन्याहू को मनाने में जुटे हैं। इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि अगले हफ्ते वॉशिंगटन में लेबनान पर अहम बैठक हो सकती है।

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