कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कर्नाटक के कई अहम मुद्दे उठाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में शिवकुमार ने कहा कि मजबूत दक्षिण ही मजबूत भारत की नींव है। उन्होंने कर्नाटक के लिए वित्तीय हिस्सेदारी, केंद्रीय अनुदान, जल बंटवारे, परिसीमन, महिला आरक्षण, बुनियादी ढांचे और किसानों समेत कई मुद्दों पर राज्य की प्राथमिकताएं परिषद के सामने रखीं।
डीके शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक भारत की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाता है. राज्य देश की 5.5 फीसदी आबादी के साथ भारत की जीडीपी में करीब 9 फीसदी योगदान देता है. भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में कर्नाटक की हिस्सेदारी करीब 42 फीसदी है और राज्य में 1,100 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक एयरोस्पेस, कॉफी और प्रोसेस्ड घेरकिन के निर्यात में भी आगे है, जबकि बेंगलुरु दुनिया के टॉप पांच AI शहरों में शामिल है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से फ्रीज करने की मांग नहीं की।
वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग
शिवकुमार ने परिषद के सामने कर्नाटक की विभाज्य कर pool में हिस्सेदारी 3.6 फीसदी से बढ़ाकर 4.7 फीसदी करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत हिस्सेदारी घटने के कारण छह वर्षों में राज्य को अनुमानित 65,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. उन्होंने 15वें वित्त आयोग की ओर से अनुशंसित 5,495 करोड़ रुपये के विशेष अनुदान और 6,000 करोड़ रुपये के राज्य-विशिष्ट अनुदान जारी करने की मांग भी की. इसके साथ ही बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल, STRR South, रायचूर में AIIMS और कल्याण कर्नाटक के लिए विशेष पैकेज में केंद्र से अधिक सहयोग की मांग उठाई।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर भी उठाई आवाज
डीके शिवकुमार ने दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन के लिए 1971 की जनसंख्या को आधार बनाए रखने की व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने मांग की कि जनगणना का इंतजार किए बिना महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
पानी के बंटवारे की जगह सहयोग पर जोर
बैठक में जल विवादों को लेकर भी कर्नाटक का पक्ष रखा गया। शिवकुमार ने कहा कि पानी के बंटवारे की राजनीति से आगे बढ़कर समानता, पारदर्शिता और सहयोग के आधार पर जल प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कावेरी, कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्नार और पालार नदी घाटियों में कर्नाटक के कानूनी हिस्से और दूसरे तटवर्ती राज्यों के अधिकारों की रक्षा की बात कही. मेकेदाटु परियोजना को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कर्नाटक के लिए नहीं, बल्कि तमिलनाडु के लिए भी अहम है। उनके मुताबिक परियोजना से मिलने वाला पानी तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के लिए भी फायदेमंद होगा।
स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों से जुड़े मुद्दे भी उठाए
डीके शिवकुमार ने स्वास्थ्य सेवाओं के वित्तपोषण, शिक्षा और पोषण, गरीब परिवारों के लिए आवास, तटीय इलाकों में कटाव और आपदा सहायता जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देने की मांग की. इसके अलावा खनन, खनिज संपदा वाले राज्यों के वित्तीय अधिकार, केंद्रीय संस्थानों को राज्यों की ओर से दी गई जमीन, न्याय व्यवस्था, डिजिटल बुनियादी ढांचे, बैंकिंग और वित्तीय समावेशन तथा किसानों के लिए सहायता का मुद्दा भी परिषद के सामने रखा।
खनिज राज्यों के वित्तीय अधिकारों की रक्षा की मांग
उन्होंने Mines & Minerals (Development & Regulation) Bill, 2026 पर दोबारा विचार करने की मांग की. शिवकुमार ने कहा कि खनिज संपदा वाले राज्यों के वित्तीय अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है और राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर ही इस तरह के फैसले लिए जाने चाहिए।
ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए कानून मजबूत करने पर जोर
बढ़ती नशीली दवाओं की तस्करी की चुनौती का भी मुद्दा बैठक में उठाया गया. शिवकुमार ने कहा कि ड्रग्स तस्करी से निपटने के लिए कानून, कार्रवाई और अभियोजन व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
‘दक्षिण का आर्थिक योगदान, संसाधनों में भी मिले उचित हिस्सेदारी’
डीके शिवकुमार ने कहा कि मजबूत दक्षिण एक मजबूत भारत के लिए जरूरी है. दक्षिण भारत देश की आर्थिक प्रगति में बड़ा योगदान दे रहा है, इसलिए संसाधनों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और राज्यों के सम्मान के मामले में भी उचित संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक केंद्र सरकार और दक्षिणी राज्यों के साथ मिलकर सहयोग को मजबूत करने और एक मजबूत भारत के निर्माण की दिशा में काम करने के लिए तैयार है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने भी उठाए कई मुद्दे
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय ने 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार से मांग की कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसी भी राज्य को संसद में उसके मौजूदा प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में कमी का नुकसान नहीं उठाना पड़े. उन्होंने केंद्र से इस संबंध में स्पष्ट विधायी आश्वासन देने की मांग की. टीवीके प्रमुख विजय ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से फ्रीज करने की मांग नहीं की।