दिल्ली में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए दिल्ली डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल (LG) तरणजीत सिंह संधू ने की। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद और प्रवेश वर्मा भी मौजूद रहे. इस हाई-लेवल मीटिंग में राजधानी की सुरक्षा, फायर सेफ्टी, मानसून की तैयारियों और फायर डिपार्टमेंट में खाली पदों को भरने जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।
फायर डिपार्टमेंट में होगी पूर्व अग्निवीरों की भर्ती
बैठक का सबसे अहम बिंदु फायर डिपार्टमेंट (Delhi Fire Service) को मजबूत करना रहा। एलजी ने सुझाव दिया कि फायर डिपार्टमेंट में कर्मचारियों की कमी को दूर करने और मौजूदा खाली पदों को भरने के लिए ‘पूर्व अग्निवीरों’ (Agniveers) को काम पर रखा जाए। अग्निवीरों की ट्रेनिंग और उनका अनुशासन आपदा के समय बचाव कार्यों में बेहद कारगर साबित हो सकता है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते बनाई गई अधिकारियों की टीमों को निर्देश दिया गया है कि वे समय पर अपनी ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATRs) जमा करें।
अवैध इमारतों और फायर सेफ्टी पर सख्त एक्शन
दिल्ली में लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माण और आग लगने की घटनाओं को लेकर भी बैठक में गहरी चिंता व्यक्त की गई. शहर में गैर-कानूनी इमारतों के खिलाफ चल रहे मौजूदा ऑपरेशन्स का पूरी तरह से रिव्यू किया गया। फायर सेफ्टी के संबंध में लाइसेंस के गलत इस्तेमाल को रोकने और भविष्य की तैयारियों पर जोर दिया गया. एलजी ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई सख्त होनी चाहिए, लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाए कि आम लोगों को इससे बेवजह परेशानी न हो।
मानसून और बाढ़ के लिए ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति
बैठक के अंत में इस बात पर जोर दिया गया कि हालांकि दिल्ली की आपदा से जुड़ी कमजोरियां बड़ी चुनौतियां पेश करती हैं, लेकिन यही चुनौतियां हमें अपनी तैयारियों को मजबूत करने और रिस्पॉन्स सिस्टम को बेहतर बनाने का एक बड़ा मौका भी देती हैं।








