दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने महिला अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया, आयु में 10 वर्ष की छूट 2024 की तरह अब भी रहेगी लागू

आशीष सूद: “हमें गलत जानकारी दी गई थी कि 2024 में महिलाओं को 10 वर्ष की आयु में छूट नहीं दी गई थी, जिसे मेरे निदेशक तुरंत सुधारेंगे।”

नई दिल्ली । एक भरोसेमंद और निर्णायक कदम उठाते हुए दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने हजारों महिला अध्यापक अभ्यर्थियों को यह आश्वासन दिया है कि महिला उम्मीदवारों के लिए 10 वर्ष की आयु सीमा में छूट, जो 2024 की टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) भर्ती अधिसूचना में लागू थी, आगामी डीएसएसएसबी भर्ती में भी जारी रहेगी।

यह घोषणा उस समय की गई जब महिला शिक्षक अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर हाल ही में जारी डीएसएसएसबी अधिसूचना से आयु छूट हटाए जाने पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।

अभ्यर्थियों ने बताया कि 2024 की भर्ती अधिसूचना में महिलाओं के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष थी, जबकि 2025 की अधिसूचना में इसे गलत रूप से 30 वर्ष कर दिया गया। उन्होंने मंत्री से अनुरोध किया कि इस नीति में न्याय और निरंतरता सुनिश्चित की जाए।

 

शिक्षा मंत्री की तत्पर और संवेदनशील प्रतिक्रिया

 

प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने तुरंत शिक्षा निदेशक से संपर्क किया और मामले की जांच कराई। पिछले वर्ष की अधिसूचना का अवलोकन करने पर यह पाया गया कि 2025 के विज्ञापन के मसौदे के दौरान गलत जानकारी साझा की गई थी।

इस पर मंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि अधिसूचना की समीक्षा कर उसे संशोधित किया जाए, ताकि महिला अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा में वही छूट लागू रहे जो 2024 में थी।

“हमें गलत जानकारी दी गई थी कि 2024 में महिलाओं को 10 वर्ष की आयु में छूट नहीं दी गई थी, जिसे मेरे निदेशक तुरंत सुधारेंगे,” शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा।

महिला अभ्यर्थियों ने मंत्री की त्वरित, विनम्र और सहानुभूतिपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए आभार व्यक्त किया और इसे महिला सशक्तिकरण और न्याय के प्रति भाजपा-शासित दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता का सच्चा उदाहरण बताया।

 

संवैधानिक और नीतिगत पृष्ठभूमि

 

महिलाओं को आयु सीमा में छूट देने का सिद्धांत भारत के संविधान और प्रशासनिक ढांचे में निहित सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना पर आधारित है।

संविधान का अनुच्छेद 15(3) राज्य को यह अधिकार देता है कि वह महिलाओं और बच्चों के हित में विशेष प्रावधान बना सके, उनकी विशिष्ट सामाजिक और पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए।

इसके अलावा, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 1980 के दशक से अपने दीर्घकालिक नीति ढांचे और दिल्ली सरकार की भर्ती प्रक्रियाओं के अनुरूप महिलाओं को आयु सीमा में छूट का समर्थन किया है। यह नीति विवाह, मातृत्व और पारिवारिक उत्तरदायित्वों के कारण महिलाओं के करियर में आने वाले अवरोधों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है, ताकि वे समान रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकें और सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों, विशेष रूप से शिक्षा में योगदान दे सकें।

 

अभ्यर्थियों ने जताया आभार

 

एक शिक्षक अभ्यर्थी सुश्री सुमन टी. मिश्रा ने मंत्री की संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा “हम शिक्षा मंत्री आशीष सूद जी के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करती हैं, जिन्होंने हमारी बात को न केवल सुना बल्कि तत्काल समाधान का आश्वासन भी दिया। उनका यह कदम महिलाओं के प्रति सच्चे सम्मान को दर्शाता है, देवी, मां और बहन के रूप में। हम माननीय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी, भाजपा नेतृत्व, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के भी आभारी हैं, जिनकी ‘नारी शक्ति’ की भावना पूरे देश में महिलाओं को प्रेरित और सशक्त कर रही है।”

 

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम

 

शिक्षा मंत्री के इस निर्णय का अभ्यर्थियों और शिक्षा जगत दोनों ने स्वागत किया है। इसे न्याय, समावेशिता और लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।

यह निर्णय न केवल दिल्ली सरकार की पारदर्शी और संवेदनशील शासन प्रणाली में जनता के विश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि किसी भी योग्य महिला को प्रक्रिया की त्रुटियों के कारण अवसर से वंचित न होना पड़े।

अभ्यर्थियों को विश्वास है कि संशोधित अधिसूचना शीघ्र ही जारी की जाएगी, जो दिल्ली सरकार की महिला अधिकारों और शिक्षा क्षेत्र में समावेशिता के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करेगी।

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