339वीं किसान पंचायत संपन्न, युद्ध नहीं शांति चाहिए

भारत- अमरीका कृषि व्यापार समझौता रद्द करो

देश को अमरीका का गुलाम बनाने की नीति अपना रही है मोदी सरकार – डॉ. सुनीलम

2 अप्रैल को छिंदवाड़ा में होगी किसान पंचायत

 

किसान संघर्ष समिति द्वारा प्रतिमाह आयोजित की जाने वाली 339वीं किसान पंचायत राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। किसान नेताओं का स्वागत करते हुए डॉ. सुनीलम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 2016 में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था लेकिन किसानों की आय दोगुनी तो नही, आधी हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को मौन तोड़ना चाहिए, क्योंकि उनके मौन रहने से देश की संप्रभुता खतरे में पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि भारत ने अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के बाद किसी भी देश की गुलामी स्वीकार नहीं की, लेकिन मोदी सरकार ने रूस और ईरान जैसे मित्र देशों से दूरी बना ली है, जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ रहा है।
किसान पंचायत में 9 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित मजदूर किसान संसद और बरनाला में आयोजित किसान पंचायत में पारित मसौदे का समर्थन किया गया तथा भारत -अमरीका समझौता रद्द करने और तत्काल युद्ध बंद करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
किसान पंचायत में हरियाणा से अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, बिहार से किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा, उत्तर प्रदेश से क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत, हरियाणा से भारतीय किसान यूनियन (नैन) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह नैन, रीवा से किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड. शिवसिंह, छिंदवाड़ा से किसान संघर्ष समिति की प्रदेश अध्यक्ष एड. आराधना भार्गव, किसान जागृति संगठन के प्रमुख इरफान जाफरी, अखिल भारतीय किसान महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रहलाददास बैरागी, मालवा-निमाड़ क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, ग्वालियर से प्रदेश सचिव शत्रुघन यादव, सिवनी से संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक डी.डी. वासनिक, जिला अध्यक्ष पवन सनोडिया, प्रदेश सचिव भागवत परिहार सहित अनेक किसान नेता उपस्थित रहे।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए कॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि भारत-अमरीका समझौता द्विपक्षीय नहीं बल्कि अमरीका का एकतरफा फतवा है, जिसमें भारत को 18% टैरिफ देना होगा जबकि अमरीका के लिए 0% रखा गया है। साथ ही अमरीका ने यह शर्त भी रखी है कि भारत रूस जैसे मित्र देश से तेल नहीं खरीदेगा।
कॉ. पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा कि भारत-अमरीका ट्रेड डील देश के किसानों के लिए जीवन-मरण का सवाल बनती जा रही है। इसके खिलाफ देशभर के किसान एकजुट हो रहे हैं और व्यापक मुहिम चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ट्रंप घोषणा कर रहे हैं और हमारे प्रधानमंत्री उसे लागू कर रहे हैं, जो देश की संप्रभुता के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
जोगिंदर सिंह नैन ने कहा कि 10 मार्च को बरनाला में 50-60 हजार किसानों की पंचायत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पूरे देश के किसान अब एकजुट होकर सरकार की किसान विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।
शशिकांत ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से ऊपर बोनस न देने का निर्देश दिया है, जिससे केंद्र सरकार का किसान विरोधी रवैया स्पष्ट दिखाई देता है।
एड. शिवसिंह ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने चुनाव के समय किसानों से गेहूं ₹2700 प्रति क्विंटल और धान ₹3100 प्रति क्विंटल खरीदने का वादा किया था, लेकिन सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरी। अब फिर से किसानों को बोनस के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।
एड. आराधना भार्गव ने कहा कि प्रदेश के किसान गेहूं विक्रय के लिए पंजीयन हेतु लाइन में खड़े हैं, लेकिन सर्वर डाउन की समस्या बताकर पंजीयन से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कहती है कि कृषि उत्पादों का आयात नहीं होगा, लेकिन जीन संशोधित पशु आहार और सोयाबीन तेल का आयात किया जाएगा, जो अप्रत्यक्ष रूप से कृषि उत्पादों का आयात ही है।
उन्होंने बताया कि छिंदवाड़ा में एम एस पी की कानूनी गारंटी, कर्जा मुक्ति, बिजली संशोधन बिल रद्द करने, मनरेगा योजना बहाल करने और कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने सहित अन्य मुद्दों को लेकर 2 अप्रैल को किसान पंचायत आयोजित की जाएगी।
प्रहलाद दास बैरागी ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा किसान संघ के साथ बैठक के बाद गेहूं पर मात्र ₹40 बोनस देने की घोषणा की गई है, जबकि चुनावी घोषणा-पत्र में ₹2700 प्रति क्विंटल खरीदने का वादा किया गया था। महंगाई और बढ़ती लागत को देखते हुए अब गेहूं का उचित मूल्य ₹3000 प्रति क्विंटल होना चाहिए।
इरफान जाफरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना को समाप्त कर नई योजना लागू की है, जिसमें 60% राशि केंद्र और 40% राज्य सरकार को देनी होगी। यह मध्यप्रदेश सरकार के लिए संभव नहीं है क्योंकि वह अन्य योजनाओं के लिए हर एक-दो माह में करोड़ों रुपये का कर्ज ले रही है।
रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि बरलाई जागीर स्थित मालवा सहकारी शक्कर कारखाना, जो किसानों की भूमि, अंशपूंजी और परिश्रम से स्थापित सहकारी संस्था की संपत्ति है, उसे बिना शेयरधारकों की सहमति के औद्योगिक अथवा निजी प्रयोजन के लिए हस्तांतरित किया गया है। इसके विरोध में इंदौर और देवास के किसान एक माह से आंदोलन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने 2017 में किसानों को प्याज का भावांतर नहीं दिया तथा सोयाबीन और गेहूं के बोनस का भुगतान भी नहीं किया।
शत्रुघन यादव ने कहा कि ग्वालियर के आलू और सरसों उत्पादक किसानों की लागत निकालना मुश्किल हो गया है। सरसों का MSP ₹6200 प्रति क्विंटल है, लेकिन बाजार में यह ₹5500 में बिक रही है।
डी.डी. वासनिक ने कहा कि युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रोल-डीजल के संकट के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे किसान चिंतित हैं।
पवन सनोडिया ने कहा कि धान की बिक्री के बाद किसानों को भुगतान में बड़ी समस्याएं आई थीं। उन्होंने बताया कि गेहूं खरीद के लिए अभी तक केवल 25% किसानों का ही पंजीयन हो पाया है।
भागवत परिहार ने कहा कि सरकार देश के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नफरत का माहौल बना रही है। प्रधानमंत्री ने एपस्टीन फाइल पर पर्दा डालने और अडानी को बचाने के लिए अमरीका से समझौता किया है।
किसान पंचायत का संचालन डॉ. सुनीलम ने किया तथा इसका सीधा प्रसारण बहुजन संवाद पर किया गया।

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