बिहार में कांग्रेस की स्थिति हुई मजबूत!

लालू यादव के दबाव से कांग्रेस होगी मुक्त ?

भावेश कुमार
पटना । लोकसभा चुनाव के नतीजे ने कांग्रेस को नई ऊर्जा दी है। कांग्रेस पार्टी 2019 के मुकाबले 2024 में बिहार के अंदर मजबूती से उभरी है।महागठबंधन में कांग्रेस की भूमिका बढ़ने के आसार हैं, वहीं पप्पू यादव कांग्रेस पार्टी के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम ने बिहार में नई राजनीतिक तस्वीर पेश की है। महागठबंधन को बिहार में नौ सीटों पर जीत हासिल हुई। राष्ट्रीय जनता दल को चार सीटों पर जीत मिली है, जबकि कांग्रेस ने तीन सीटों पर फतह हासिल की है। इसके अलावा दो सीटें सीपीआई के खाते में गई हैं। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार पप्पू यादव चुनाव जीते। जीत के बाद पप्पू यादव कांग्रेस पार्टी का झंडा लहराते दिखे।

कांग्रेस पार्टी की मजबूत उपस्थिति महागठबंधन की सियासत की धारा को बदल सकती है। कांग्रेस ने संकेत दिए थे कि अब वह लालू प्रसाद यादव के दबाव में राजनीति करने को राजी नहीं है। लंबे अरसे के बाद बिहार में तीन लोकसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी को जीत मिली है। कांग्रेस ने कटिहार, सासाराम और किशनगंज सीटों पर जीत हासिल की है। कटिहार से तारिक अनवर, किशनगंज से मोहम्मद जावेद और सासाराम से मनोज कुमार ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा पप्पू यादव भी कांग्रेस के खाते में माने जा रहे हैं।

बिहार में कांग्रेस का 2004 के बाद सबसे शानदार प्रदर्शन है। 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को चार सीटों पर जीत मिली थी। इस बार तीन सीटें कांग्रेस के खाते में आई हैं। लालू प्रसाद यादव ने 23 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिसमें चार को जीत मिली है। कांग्रेस ने 9 उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें तीन को जीत मिली है। पप्पू यादव को मिलाकर यह संख्या चार हो जाती है।

मुस्लिम उम्मीदवारों की बात करें तो कांग्रेस और राजद दोनों ने दो-दो उम्मीदवार उतारे थे। राजद के दोनों उम्मीदवार, मधुबनी से अली अशरफ फातमी और अररिया से शाहनवाज आलम, चुनाव हार गए। जबकि कांग्रेस के दोनों अल्पसंख्यक नेता तारिक अनवर और मोहम्मद जावेद चुनाव जीत गए। इससे संकेत मिलता है कि कोसी और सीमांचल के इलाकों मे कांग्रेस की स्थिति मजबूत हुई है। मुसलमानों की बीच उनकी पैठ बन रही है।

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने राजद की बराबरी कर ली है। राजद को जहां चार लोकसभा सीटों पर जीत मिली है, वहीं कांग्रेस के खाते में भी चार सीटें हैं, ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि पप्पू यादव कांग्रेस के साथ हैं और कांग्रेस पार्टी ने उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।

कांग्रेस पार्टी ने प्रचार के दौरान साफ संकेत दे दिए हैं कि अब वह लालू प्रसाद यादव के दबाव में आने को तैयार नहीं है। लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी पर पूर्णिया में चुनावी सभा करने के लिए दबाव था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। वहां से पप्पू यादव के खिलाफ कुछ नहीं कहा था। इस परिणाम से स्पष्ट है कि बिहार में कांग्रेस की स्थिति मजबूत हुई है और अब वह लालू प्रसाद यादव के दबाव में नहीं आएगी। कांग्रेस की यह मजबूती बिहार की राजनीति में नए समीकरण और दिशा की ओर इशारा कर रही है।

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