जंतर-मंतर के 70 साल पुराने बंगले पर कांग्रेस का दावा, HC ने केंद्र और दिल्ली सरकार को भेजा नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस पार्टी की याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें जंतर मंतर रोड स्थित 7 नंबर बंगले की सेल डीड कांग्रेस के नाम करने की मांग की गई है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि यह याचिका सुनवाई के लायक है या नहीं। मामले की सुनवाई जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की बेंच में हुई। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से कहा कि पार्टी पिछले करीब 70 साल से इस बंगले पर कब्जे में है और सरकार को इसे किसी तीसरे पक्ष को आवंटित करने से रोका जाए।

सिंघवी ने अदालत से कहा कि कांग्रेस ने साल 1959 में ही इस संपत्ति की पूरी कीमत चुका दी थी, लेकिन आज तक उसके नाम पर कन्वेयंस डीड यानी मालिकाना दस्तावेज जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कई सालों से सरकार से इस बारे में मांग की जा रही है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. हालांकि हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से पहले याचिका की वैधता पर सवाल उठाया।

 

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सितंबर में की तय

 

अदालत ने कहा कि पहले यह तय होगा कि इस मामले में रिट याचिका दायर की जा सकती है या नहीं। इसके बाद ही किसी तरह की राहत पर विचार होगा। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सितंबर में तय की है। कांग्रेस ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार ने यह बंगला साल 1956 में पार्टी को आवंटित किया था।

पार्टी के मुताबिक, उसने 6 लाख 10 हजार 700 रुपये की पूरी रकम जमा कर दी थी। साथ ही प्रीमियम और ग्राउंड रेंट भी दिया गया था। याचिका में कहा गया है कि यह संपत्ति पहले ‘इवैक्यूई प्रॉपर्टी’ थी, जो बाद में केंद्र सरकार के पास आ गई. कांग्रेस का कहना है कि साल 1956 में उसे आधिकारिक तौर पर कब्जा लेने का आदेश भी दिया गया था।

 

 

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के एक फैसले का दिया हवाला

 

 

पार्टी ने यह भी कहा कि पहले किराएदारों से जुड़े मामलों और बाद में 1969 में कांग्रेस के विभाजन की वजह से दस्तावेज बनने में देरी हुई। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के एक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें मौजूदा कांग्रेस को पुरानी कांग्रेस का कानूनी उत्तराधिकारी माना गया था। कांग्रेस का दावा है कि आरटीआई के जरिए मिले सरकारी रिकॉर्ड में भी यह माना गया है कि पूरी रकम जमा हो चुकी है और सेल डीड जारी करने की सिफारिश की गई थी। इसके बावजूद 2017 से लगातार पत्र लिखने के बाद भी सरकार ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया।

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