नगर निगम जन्म/मृत्यु शाखा का लिपिक निलंबित, कार्य में लापरवाही के चलते मिली सजा : डॉ. वैशाली शर्मा

इसी शाखा के उप रजिस्ट्रार के विरूद्घ अनुशासनिक कार्यवाही के लिए स्वास्थ्य विभाग को लिखा पत्र : निगमायुक्त

 

करनाल, (विसु)। नगर निगम आयुक्त डॉ. वैशाली शर्मा ने कार्य में लापरवाही बरतने के चलते जन्म एवं मृत्यु शाखा के लिपिक प्रवीन कुमार को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ-साथ निगम की इसी शाखा में कार्यरत स्वास्थ्य विभाग के उप रजिस्ट्रार डॉ. रमेश कुमार के विरूद्घ अनुशासनिक कार्यवाही करने के लिए सिविल सर्जन करनाल को पत्र लिखा गया है। इसकी एक प्रति निदेशालय शहरी स्थानीय निकाय तथा स्टेट रजिस्ट्रार को भेजी गई है। यह कार्रवाई एक व्यक्ति द्वारा मुख्यमंत्री को दी गई शिकायत के आधार पर की गई है।
क्या था मामला- निगमायुक्त ने बताया कि शिकायकर्ता दिनेश कुमार पुत्र सोम प्रकाश ने मुख्यमंत्री हरियाणा को एक शिकायत भेजकर गुहार लगाई थी कि उनके पिता का देहांत बीती 3 अक्तूबर 2023 को करनाल में हुआ था। इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए नगर निगम कार्यालय में दस्तावेज जमा करवाए गए, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने तथा बार-बार निगम कार्यालय के चक्कर लगाने उपरांत भी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया।
निगमायुक्त ने आगे बताया कि नगर निगम कार्यालय में इस मामले की शिकायत आने के पश्चात जांच की गई, जिसमें पाया गया कि दिनेश कुमार के पिता की मृत्यु के बाद प्रमाण पत्र जारी न होने के बाद एक ऑनलाईन प्रार्थना पत्र 16 अप्रैल 2024 को प्रेषित किया गया और मृत्यु की घटना रजिस्ट्रीकृत होने बारे 19 नवंबर 2024 को अनउपलब्धता प्रमाण पत्र प्राप्त किया। इसी निरंतरता में शिकायतकर्ता द्वारा मास दिसंबर 2024 में विलंब मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने हेतू निगम कार्यालय में एक फाईल प्रस्तुत की। उप रजिस्ट्रार जन्म/मृत्यु द्वारा 12 दिसंबर 2024 को, फाईल जिला रजिस्ट्रार-सह-सिविल सर्जन, करनाल को स्वीकृति हेतू भेजी गई।
डॉ. वैशाली शर्मा ने बताया कि इसके पश्चात फाईल को उप मंडल मजिस्ट्रेट करनाल तथा जिला रजिस्ट्रार द्वारा लेट फीस लेकर विलंब मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने हेतू स्वीकृति प्रदान की गई और फाईल 18 अप्रैल 2025 को उप रजिस्ट्रार नगर निगम करनाल को प्रेषित कर दी गई। लेकिन उप रजिस्ट्रार द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई और करीब 3 महीने बिना कारण फाईल को दबाए रखा। मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत पत्र निगम कार्यालय में आने के बाद 2 जुलाई 2025 को प्रार्थी से बगैर विलंब फीस जमा करवाए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। लेकिन इसमें घोर लापरवाही बरती गई तथा सरकार को वित्तीय हानि पहुंचाने की भी कोशिश की गई।

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