Collegium Vs Govt में CJI चंद्रचूड़ का बड़ा कदम: 4 द‍िन क‍िया मंथन, उसके बाद पब्‍ल‍िक को बता दी IB और RAW की र‍िपोर्ट

नई दिल्ली 
केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) के बीच तकरार और बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ऐसा कदम उठाया है, जो शायद ही कभी हुआ हो। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक बयान में विस्तार से खुलासा किया है कि कॉलेजियम द्वारा हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए अनुशंसित नामों को केंद्र सरकार (Central Government) ने क्यों ठुकरा दिया। इस बयान में हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित खुफिया एजेंसी रॉ और आईबी (IB) की रिपोर्ट भी सार्वजनिक कर दी गई है, जो अपने आप में अप्रत्याशित है।

केंद्र सरकार की आपत्ति और कॉलेजियम का जवाब

Bar and Bench की एक रिपोर्ट के मुताबिक कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए एडवोकेट सौरभ कृपाल (Advocate Saurabh Kirpal) का नाम भेजा था। केंद्र सरकार ने उनके नाम को रिजेक्ट कर दिया और तर्क दिया है कि वो समलैंगिक (Gay) हैं और पक्षपाती हो सकते हैं। उनका पार्टनर विदेशी है । कॉलेजियम ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि संविधान यौन स्वतंत्रता की गारंटी देता है। सौरभ कृपाल, की नियुक्ति से दिल्ली हाईकोर्ट में डाइवर्सिटी आएगी। विदेशी पार्टनर होना, अयोग्यता का आधार नहीं हो सकता है।

इसी तरह कॉलेजियम ने मुंबई हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए सोमशेखर सुंदरेसन (Somasekhar Sundaresan) का नाम भेजा था। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का पक्ष है कि सुंदरेसन ने सोशल मीडिया पर पेंडिंग केसेज पर अपनी राय रखी थी। कॉलेजियम ने इसका जवाब देते हुए कहा है कि किसी मसले पर किसी अभ्यर्थी की राय उसके डिसक्वालीफिकेशन का कारण नहीं बन सकती है।

कॉलेजियम ने मद्रास हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए आर. जॉन सत्यन (R John Sathyan) का नाम सुझाया। सरकार का तर्क है कि सत्यन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर पीएम नरेंद्र मोदी की आलोचना से जुड़ा एक लेख शेयर किया था। साथ ही एक मेडिकल स्टूडेंट के सुसाइड से जुड़ा लेख भी साझा किया था। कॉलेजियम ने सरकार के इस तर्क का जवाब देते हुए कहा है कि किसी लेख को साझा करने से किसी अभ्यर्थी की योग्यता, गरिमा और कैरेक्टर पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है।

कानून मंत्रालय पर तीखी नाराजगी जताई

कॉलेजियम ने केंद्रीय कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ( Union Law Ministry’s Department of Justice (DoJ)) पर भी तीखी आपत्ति जताई है। दरअसल, कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्ति के लिए एडवोकेट अमितेश बनर्जी और शाक्य सेन का नाम सुझाया था। जो जुलाई 2019 से ही सरकार के पास पेंडिंग है।

4 दिन के मंथन के बाद CJI ने लिया कड़ा फैसला

कॉलेजियम द्वारा सुझाए गए नामों को जिस तरीके से केंद्र सरकार ने ठुकराया और कॉलेजियम ने जैसे प्रतिक्रिया दी है, उसे अप्रत्याशित बताया जा रहा है। एनडीटीवी की की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) ने 4 दिनों तक विचार विमर्श और मंथन के बाद केंद्र सरकार की आपत्तियों का विस्तार से जवाब देने का फैसला लिया।

तय किया कि पूरी बात सार्वजनिक की जाए। जिसमें रॉ और आईबी की रिपोर्ट का भी हवाला दिया जाए और उसपर कॉलेजियम का क्या स्टैंड है, यह भी बताया जाए। CJI चंद्रचूड़ ने बयान सार्वजनिक करने से पहले इसपर कॉलेजियम के अन्य सदस्यों से गहरी मंत्रणा की।

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