रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन की एकाधिकार को चुनौती: भारत-अर्जेंटीना साझेदारी का खेल

भारत ने रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ पृथ्वी खनिज) के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है, जिसे मीडिया में “भारत की गोद में जा बैठा चीन का ये दोस्त” के रूप में वर्णित किया जा रहा है। यहां “चीन का दोस्त” से तात्पर्य अर्जेंटीना से है, जो लंबे समय से चीन का करीबी सहयोगी रहा है। लेकिन अब भारत ने अर्जेंटीना के साथ साझेदारी करके इन महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। यह “खेल” वास्तव में भारत की रणनीतिक ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी स्वावलंबन की दौड़ है, जहां चीन की 90% वैश्विक आपूर्ति पर निर्भरता को कम करना मुख्य लक्ष्य है।

 

रेयर अर्थ मिनरल्स क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण?

रेयर अर्थ मिनरल्स 17 दुर्लभ धातुओं का समूह हैं, जो आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। इनका उपयोग:

इलेक्ट्रॉनिक्स में: स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी, कैमरा लेंस।
ग्रीन एनर्जी में: इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी, पवन टर्बाइन, सोलर पैनल।
रक्षा में: मिसाइल, रडार, चुंबक (मैग्नेट्स) और अन्य सिस्टम।

वैश्विक उत्पादन का लगभग 90% चीन के नियंत्रण में है, जो भारत जैसे देशों के लिए खतरा है। भारत को इनकी भारी मात्रा आयात करनी पड़ती है, जो आपूर्ति बाधित होने पर अर्थव्यवस्था और रक्षा को प्रभावित कर सकती है।
“चीन का दोस्त” अर्जेंटीना क्यों?

अर्जेंटीना दक्षिण अमेरिका का एक प्रमुख खनिज-समृद्ध देश है, जहां रेयर अर्थ के बड़े भंडार हैं। यह लिथियम (EV बैटरी के लिए जरूरी) का भी बड़ा उत्पादक है।
चीन ने अर्जेंटीना में भारी निवेश किया है—खनन परियोजनाओं के जरिए। इसलिए इसे “चीन का दोस्त” कहा जा रहा है। लेकिन भारत ने अब अर्जेंटीना के साथ साझेदारी का रास्ता चुना है, जो चीन की एकाधिकार को सीधे चुनौती देता है।
हाल की खबरों के अनुसार, भारत सरकार ने विदेशी खनिज संपत्तियों के अधिग्रहण को आसान बनाने के लिए नीतिगत बदलाव किए हैं। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव महावीर सिंघवी ने स्पष्ट संकेत दिया कि किसी एक देश (चीन पर इशारा) पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अन्य देशों की ओर रुख कर रहा है।

इसके अलावा, भारत ऑस्ट्रेलिया पर भी भरोसा बढ़ा रहा है, जो रेयर अर्थ का एक उभरता स्रोत है। यह “चीन प्लस वन” रणनीति का हिस्सा है, जहां कंपनियां चीन से बाहर उत्पादन स्थानांतरित कर रही हैं।
इस “खेल” के पीछे मुख्य वजहें

 

भारत की यह चाल कई स्तरों पर रणनीतिक है। यहां प्रमुख कारण:

 

आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती: कोविड-19 और भू-राजनीतिक तनावों (जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध) ने दिखाया कि एक देश पर निर्भरता जोखिम भरी है। भारत EV, सोलर और डिफेंस सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा है, जहां रेयर अर्थ की मांग 2030 तक 5 गुना बढ़ सकती है।
घरेलू क्षमता बढ़ाना: भारत अपने खनन और प्रसंस्करण को मजबूत कर रहा है, लेकिन विदेशी साझेदारियां जरूरी हैं। अर्जेंटीना जैसे देशों से सौदे लंबे समय की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
चीन को काउंटर: सीमा विवाद के बीच, यह आर्थिक मोर्चे पर जवाब है। चीन की एकाधिकार को तोड़कर भारत वैश्विक आपूर्ति में मजबूत खिलाड़ी बनेगा।
ग्लोबल ट्रेंड: अमेरिका, यूरोप और जापान भी चीन से दूर हो रहे हैं। भारत का कदम QUAD और I2U2 जैसे गठबंधनों से जुड़ता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

पहलूचीन की स्थितिभारत की नई रणनीतिउत्पादन हिस्सा~90% वैश्विकअर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया से साझेदारीनिर्भरताभारत का अधिकांश आयात चीन सेविविधीकरण, विदेशी अधिग्रहणप्रभावएकाधिकार से लाभभारत को लचीलापन, चीन को चुनौती
निष्कर्ष: भारत की जीत का रोडमैप
यह साझेदारी भारत को “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य के करीब ले जाती है। 22 सितंबर 2025 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम चीन को चिंतित कर सकता है, क्योंकि अर्जेंटीना जैसे सहयोगी उसके प्रभाव क्षेत्र से खिसक सकते हैं। भविष्य में, भारत के पास रेयर अर्थ के घरेलू भंडार (जैसे आंध्र प्रदेश, ओडिशा) को विकसित करने का मौका भी है। कुल मिलाकर, यह “खेल” ऊर्जा, तकनीक और भू-राजनीति का मिश्रण है—जिसमें भारत मजबूती से खेल रहा है।

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