बड़ी अस्थिरता का कारण बन रहा था यह युद्ध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 जून को घोषणा की थी कि ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों से चले आ रहे सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक “पूर्ण और संपूर्ण युद्धविराम” पर सहमति बन गई है। ट्रंप के अनुसार यह युद्धविराम चरणबद्ध तरीके से लागू होगा जो 24 जून 2025 की मध्यरात्रि से शुरू होकर 24 घंटे में पूर्ण रूप से प्रभावी हो जाएगा। इस घोषणा के बाद मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जताई गई थी, क्योंकि यह युद्ध क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अस्थिरता का कारण बन रहा था।
हालांकि ईरान ने शुरू में ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि अगर इजरायल तेहरान समयानुसार सुबह 4 बजे तक हमले रोक देता है, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। बाद में, ईरान ने युद्धविराम की पुष्टि की, जबकि इजरायल ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की।
इस युद्धविराम की घोषणा से पहले, दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। इजरायल ने 13 जून 2025 को ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला शुरू किया था, जिसके जवाब में ईरान ने इजरायल और कतर व इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं। अमेरिका ने भी ईरान के तीन परमाणु केंद्रों—इस्फहान, नतांज, और फोर्डो—पर हमले किए, जिससे स्थिति और जटिल हो गई थी।
ट्रंप ने इस सीजफायर को मध्य पूर्व में शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम बताया और दोनों देशों की “हिम्मत और समझदारी” की तारीफ की। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने सवाल उठाया कि क्या ट्रंप ने जल्दबाजी में यह घोषणा की, क्योंकि ईरान ने शुरू में इसे शर्तों के आधार पर स्वीकार किया, न कि पूर्ण समझौते के रूप में। कुल मिलाकर, यह युद्धविराम मध्य पूर्व में तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इसकी स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष इसे कितनी गंभीरता से लागू करते हैं।






