SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों हुई?
बंगाल के अलावा राजस्थान, गोवा, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में भी SIR हुई, जहां कुल 1.02 करोड़ नाम कटे (कुल मतदाताओं का 7.6%)। लेकिन बंगाल में सबसे ज्यादा (58 लाख)।
बिहार-यूपी कनेक्शन: हिंदी भाषी क्षेत्रों में ज्यादा कटौती
उच्च कटौती वाले क्षेत्र (हिंदी भाषी बहुल):क्षेत्रकटौती प्रतिशतटिप्पणीजोरासांको36.66%हिंदी भाषी आबादी अधिकचौरंगी35.45%बीजेपी की मजबूत पकड़कोलकाता उत्तर25.92%प्रवासी मजदूर बहुलकोलकाता दक्षिण23.82%यूपी-बिहार कनेक्शनभवानीपुर (ममता बनर्जी की सीट) 21.55%2.06 लाख में से 44,787 नाम कटेहावड़ा उत्तर26.89%बैरकपुर19.01%आसनसोल उत्तर14.71%आसनसोल दक्षिण13.68%
पूर्व CPI(M) नेता सुजान चक्रवर्ती के मुताबिक, ये कटौती बिहार-यूपी के प्रवासी मजदूरों के नामों से जुड़ी हैं, जो गृह राज्य की लिस्ट में बने रहे।
दिलचस्प: बीजेपी के कोर वोटबैंक मतुआ समुदाय (बांग्ला हिंदू शरणार्थी) बहुल इलाकों में भी कटौती हुई, जैसे कसबा (17.95%), सोनारपुर दक्षिण (11.29%)।
मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में कम कटौती: पूर्वाग्रह का आरोप
टीएमसी का दावा: ये आंकड़े बीजेपी के “रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठिए” के दावों को झूठा साबित करते हैं। कुल फर्जी वोटर सिर्फ 1.83 लाख पाए गए।
ये ड्राफ्ट जारी होते ही दोनों पार्टियां भिड़ गईं। टीएमसी इसे अपनी जीत बता रही है, जबकि बीजेपी इसे TMC की साजिश।
टीएमसी की तरफ से:
महासचिव अभिषेक बनर्जी: “SIR ने बीजेपी के झूठे दावों को बेनकाब किया। बंगालियों को बदनाम करने के लिए माफी मांगो।”
प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती: “कटे नाम यूपी-बिहार के हैं, बांग्लादेशी नहीं। जनगणना से सच्चाई सामने आएगी।”
बीजेपी की तरफ से:
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी: “राज्य प्रशासन ने SIR में हेरफेर किया। TMC ने तटस्थता का उल्लंघन किया, पुलिस का दुरुपयोग। मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखा।”
केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार: “1 करोड़ से ज्यादा संदिग्ध वोटर थे। अगर CAA समय पर न लिया तो ममता जिम्मेदार।”






