बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के करीब आते ही राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में RJD नेता तेजस्वी यादव ने NDA पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि NDA नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाएगा। तेजस्वी के अनुसार, BJP केवल वोट बैंक के लिए नीतीश को साथ रख रही है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन्हें किनारे कर देगी। उन्होंने कहा, “जो हालात अब तक दिख रहे हैं, उसी के आधार पर कहा जा सकता है कि बिहार में एनडीए नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी। यह नीतीश कुमार को भी स्पष्ट है।” यह बयान बिहार की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इससे NDA के अंदरूनी समीकरणों पर सवाल उठे हैं।
RJD के ‘दरवाजे’ खुले या बंद? परिवार में ही मतभेद
आपके सवाल का केंद्र बिंदु—नीतीश कुमार के लिए RJD के दरवाजे खुले हैं या नहीं—यह बिहार की राजनीति का पुराना सवाल है, जो बार-बार उठता रहता है। तेजस्वी यादव ने हाल ही में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नीतीश के लिए RJD का दरवाजा बंद है। दिसंबर 2024 में सीतामढ़ी में उन्होंने नीतीश को “रिटायर” बताते हुए कहा, “नीतीश कुमार अब रिटायर हो चुके हैं, उनके लिए दरवाजे पूरी तरह बंद हैं।” यह बयान RJD विधायक भाई वीरेंद्र के नीतीश को गठबंधन का ऑफर देने वाले बयान के जवाब में आया था, जिसे तेजस्वी ने “व्यक्तिगत” करार दिया।
हालांकि, RJD परिवार में इस मुद्दे पर कन्फ्यूजन बरकरार है। लालू प्रसाद यादव और उनकी बेटी मीसा भारती का कहना है कि नीतीश के लिए दरवाजे खुले हैं, जबकि तेजस्वी और तेज प्रताप यादव इसे साफ-साफ बंद बताते हैं। जनवरी 2025 में लालू के “दरवाजे खुले” वाले बयान ने तो सियासत में भूचाल ला दिया था, लेकिन तेजस्वी ने इसे खारिज कर दिया। जून 2025 तक भी यह मतभेद चर्चा में रहा, जहां लालू ने “वेलकम” कहा तो तेजस्वी ने “नो एंट्री”।
हालिया घटनाक्रम: JDU से RJD में ‘शिफ्ट’
अक्टूबर 2025 में तेजस्वी ने JDU को बड़ा झटका दिया, जब पार्टी के तीन प्रमुख नेता—पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा, पूर्व विधायक राहुल शर्मा और सांसद गिरधारी यादव—RJD में शामिल हो गए। यह कदम नीतीश सरकार के खिलाफ RJD की रणनीति का हिस्सा लगता है, लेकिन गठबंधन की कोई नई संभावना नहीं दिखाई। उधर, रोहिणी आचार्य (लालू की बेटी) ने नवंबर 2025 में दावा किया कि नीतीश की सत्ता से विदाई तय है और तेजस्वी के नेतृत्व में RJD सरकार बनेगी।
कुल मिलाकर, तेजस्वी का ताजा दावा NDA की कमजोरी पर केंद्रित है, न कि नीतीश को वापस बुलाने पर। RJD की प्राथमिकता महागठबंधन को मजबूत करना और बिहार में “तेजस्वी सरकार” लाना लगती है। चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में ये बयान रणनीतिक हो सकते हैं। अगर कोई नया अपडेट आता है, तो बिहार की सियासत फिर से पलट सकती है—नीतीश के “पलटीबाज” इतिहास को कौन भूल सकता है!








