नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार ने 29 जनवरी को कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों (सरकारी सेवकों) के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नए नियम लागू करने का बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 में संशोधन के जरिए आया है, जिसमें नियम 9 के तहत नया उपनियम जोड़ा गया है। मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, एक्स/ट्विटर, टेलीग्राम आदि) के दुरुपयोग को रोकना है, ताकि आपत्तिजनक, विवादित या सरकारी नीतियों पर व्यक्तिगत राय देने जैसी गतिविधियां गंभीर कदाचार न बनें। उल्लंघन पर विभागीय कार्रवाई होगी।
प्रमुख नियम और प्रतिबंध:
अकाउंट बनाने से पहले अनुमति अनिवार्य: कोई भी सरकारी कर्मचारी या पदाधिकारी सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या चलाने से पहले अपने सक्षम अधिकारी (competent authority) से लिखित अनुमति लेगा।
फर्जी/गुमनाम अकाउंट पर पूर्ण रोक: छिपे हुए या फर्जी नाम से अकाउंट चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
व्यक्तिगत लाभ पर रोक: सोशल मीडिया से कोई व्यक्तिगत फायदा (जैसे कमाई या प्रमोशन) नहीं उठा सकेंगे।
सरकारी कार्यों का प्रसारण बैन: कार्यस्थल से वीडियो बनाना, लाइव स्ट्रीमिंग करना, सरकारी गतिविधियां/दस्तावेज/चर्चा शेयर करना वर्जित है।
नीतियों पर व्यक्तिगत राय नहीं: सरकारी नीतियों, फैसलों, अदालती आदेशों पर अपनी राय पोस्ट नहीं कर सकेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपशब्द या विरोधी पोस्ट दंडनीय।
ट्रोलिंग/भड़काऊ सामग्री: किसी को ट्रोल करना, भड़काऊ, विभाजनकारी या आपत्तिजनक पोस्ट करना सेवा आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। संवेदनशील जानकारी शेयर न करें: कोई भी गोपनीय या संवेदनशील जानकारी पोस्ट नहीं की जा सकेगी।
फर्जी/गुमनाम अकाउंट पर पूर्ण रोक: छिपे हुए या फर्जी नाम से अकाउंट चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
व्यक्तिगत लाभ पर रोक: सोशल मीडिया से कोई व्यक्तिगत फायदा (जैसे कमाई या प्रमोशन) नहीं उठा सकेंगे।
सरकारी कार्यों का प्रसारण बैन: कार्यस्थल से वीडियो बनाना, लाइव स्ट्रीमिंग करना, सरकारी गतिविधियां/दस्तावेज/चर्चा शेयर करना वर्जित है।
नीतियों पर व्यक्तिगत राय नहीं: सरकारी नीतियों, फैसलों, अदालती आदेशों पर अपनी राय पोस्ट नहीं कर सकेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपशब्द या विरोधी पोस्ट दंडनीय।
ट्रोलिंग/भड़काऊ सामग्री: किसी को ट्रोल करना, भड़काऊ, विभाजनकारी या आपत्तिजनक पोस्ट करना सेवा आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। संवेदनशील जानकारी शेयर न करें: कोई भी गोपनीय या संवेदनशील जानकारी पोस्ट नहीं की जा सकेगी।
ये नियम सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होंगे, और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए लिए गए हैं। अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए जरूरी कदम है। सोशल मीडिया पर सक्रिय सरकारी कर्मचारी अब सावधानी बरतें, वरना नौकरी पर असर पड़ सकता है! अगर आप बिहार में सरकारी नौकरी करते हैं, तो अपने अकाउंट चेक करें और जरूरत पड़ने पर अनुमति लें।








