बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से ठीक पहले महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम दलों आदि) में सीट साझेदारी को लेकर बातचीत अटक गई है। आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव कांग्रेस को 50 से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं हैं, जबकि कांग्रेस अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर अड़ी हुई है। इस पेंच को सुलझाने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह को मैदान में उतारा गया है, जो लालू के करीबी माने जाते हैं। अखिलेश सिंह ने 10 अक्टूबर 2025 को लालू से मुलाकात की थी और 11 अक्टूबर को फिर चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि वे ही कोई फॉर्मूला निकालेंगे जो सभी को मान्य हो।
प्रस्तावित सीट फॉर्मूला और वार्ता की स्थिति
सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी का प्रस्तावित फॉर्मूला 2020 के मुकाबले कुछ घटा-बढ़ा हुआ है:
आरजेडी: 138 सीटें (2020 में 144 थीं)।
कांग्रेस: 57 सीटें (2020 में 70 थीं, लेकिन लालू 50 से ज्यादा पर अड़े हैं)।
सीपीआई-एमएल: 18 सीटें (2020 में 19)।
वीआईपी (मुकेश सहनी): 16 सीटें।
सीपीआई: 6 सीटें।
सीपीएम: 4 सीटें।
जेेएमएम (हेमंत सोरेन): 2 सीटें।
आरएलजेपी (पशुपति पारस): 2 सीटें (लालू ने पारस को गठबंधन में शामिल करने के लिए विलय का प्रस्ताव दिया है)।
दूसरी ओर, एक रिपोर्ट के अनुसार फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है, जिसमें लालू के “गुरु प्रसाद” से सहमति बनी:
आरजेडी: 130-135 सीटें।
कांग्रेस: 50-55 सीटें।
वीआईपी: 14 सीटें।
पशुपति पारस: 3 सीटें।
जेेएमएम: 2 सीटें।
इसके अलावा, महागठबंधन में तीन डिप्टी सीएम पदों का प्रस्ताव भी है। जेएमएम ने 12 सीटों की मांग कर तनाव बढ़ा दिया है, जबकि कांग्रेस ने कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिए हैं। तेजस्वी यादव आज (11 अक्टूबर) देर शाम दिल्ली पहुंचकर राहुल गांधी से मिल सकते हैं, जहां रणनीति पर चर्चा होगी।
पृष्ठभूमि और चुनौतियां
2020 चुनाव में महागठबंधन को कुल 110 सीटें मिली थीं (आरजेडी-75, कांग्रेस-19, अन्य)। अब कुल 243 सीटों पर दांव है, और एनडीए (बीजेपी-जेडीयू आदि) भी दिल्ली में अपनी बैठक कर रहा है। कांग्रेस आलाकमान के नेता जैसे अशोक गहलोत और जयराम रमेश पटना में हैं, लेकिन लालू-तेजस्वी को “भाव” नहीं दे रहे, जिससे दरार की आशंका है। फोकस अब जीतने योग्य उम्मीदवारों पर है, न कि सिर्फ संख्या पर।








