नोएडा, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 6 महीने के लिए हड़तालों पर लगाए गए प्रतिबंध को सीटू गौतम बुध नगर ने लोकतंत्र और श्रमिक अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि यह कदम सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।
प्रमुख बिंदु:
* संवैधानिक अधिकार पर चोट: हड़ताल करना श्रमिकों-कर्मचारियों का बुनियादी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है। जब सरकार संवाद बंद कर दे और मांगें अनसुनी करे, तब हड़ताल ही आखिरी रास्ता बचता है। इस पर रोक लगाना असहमति की आवाज दबाना है। • स्थायी नौकरियों की जगह संविदा: सरकार “संविदा कर्मी नहीं हटेंगे” कहकर असली मुद्दे से ध्यान भटका रही है। हकीकत यह है कि स्थायी पद खत्म कर आउटसोर्सिंग और संविदा को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे निजी कंपनियों को फायदा और कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से वंचित किया जा रहा है। • रिक्त पद और बढ़ता बोझ: प्रदेश के विभागों में लाखों पद खाली हैं। इससे कार्यरत कर्मचारियों पर बोझ बढ़ रहा है और जनता को समय पर सेवाएं नहीं मिल रही। समाधान प्रतिबंध नहीं, भर्ती है। • श्रम कानूनों का उल्लंघन: न्यूनतम मजदूरी, समान काम-समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे कानूनी अधिकारों से श्रमिकों को वंचित रखा जा रहा है। सरकार की जिम्मेदारी अधिकार देना है, न कि आवाज कुचलना।
सीटू की मांगें:
1. हड़ताल पर लगाया गया प्रतिबंध तुरंत वापस लिया जाए 2. सभी रिक्त पदों पर तत्काल स्थायी भर्ती की जाए 3. आउटसोर्सिंग/संविदा प्रथा खत्म कर वर्षों से कार्यरत कर्मियों को नियमित किया जाए 4. श्रमिक संगठनों के साथ सार्थक संवाद कर लंबित मांगें हल की जाएं
गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की यह कोशिश बेहद खतरनाक है। सीटू गौतम बुध नगर के सभी श्रमिकों, कर्मचारियों, किसानों, युवाओं और नागरिकों से अपील करता है कि लोकतंत्र और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज बुलंद करें।








