अभिजीत पाण्डेय
पटना । लोजपा आर के प्रमुख व सांसद चिराग पासवान विपक्ष पर करारा वार किया है। उन्होने कहा जब भी कांग्रेस शिकस्त खाने लगती है, तो वो दलित कार्ड को आगे कर देती है। यही उसकी नीति और नीयत है।
चिराग पासवान ने एक्स पर लिखा, जब भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष को पता चलता है कि उनकी हार सुनिश्चित है, तो वे दलित कार्ड चल देते हैं। 2002 में जब उन्हें पता था कि वे उपराष्ट्रपति पद का चुनाव हार रहे हैं, तो उन्होंने सुशील कुमार शिंदे को उम्मीदवार बना दिया। 2017 में जब वे जानते थे कि वे राष्ट्रपति पद का चुनाव हार रहे हैं तो उन्होंने मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया।
अब जब उनके पास स्पष्ट रूप से लोकसभा अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए संख्याबल नहीं है तो वे कांग्रेस के दलित के नेता के सुरेश को नामांकित कर रहे हैं। विपक्ष के लिए क्या दलित नेता केवल और केवल प्रतीकात्मक उम्मीदवार हैं ? इस बार विपक्ष ने 8 बार के सांसद और कांग्रेस नेता के सुरेश का नाम लोकसभा स्पीकर के लिए तय किया है। सुरेश ने अपना नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया है।
बीजेपी इसे अवसरवादी राजनीति करार दे रही है। उसका आरोप है कि कांग्रेस संसद की मर्यादा का उल्लंघन कर रही है।कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना है कि अगर सरकार डिप्टी स्पीकर पद दे, तो हम उनका नामांकन वापस ले सकते हैं।








