राहुल गांधी को मोहब्बत के बाजार में नफरत की दुकान साबित करने का प्रयास! 

चरण सिंह

जब कोई किसी का रास्ता रोककर खड़ा हो जाएगा तो वह क्या करेगा ? ऐसा ही धक्का कांड में राहुल गांधी प्रकरण लग रहा है। आखिर राहुल गांधी का रास्ता रोकने की बीजेपी सांसदों को जरूरत ही क्या थी ? राहुल गांधी प्रतिपक्ष नेता हैं। क्या राहुल गांधी आकर खुद बीजेपी के सांसदों से भिड़े थे ? ये प्रश्न धक्का कांड में अपने आप खड़े हो जा रहे हैं। दरअसल यह सब बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह बीजेपी की अम्बेडकर मुद्दे से भटकाने रणनीति मानी जा रही है। राहुल गांधी जो नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान की बात करते हैं, ऐसे में अब बीजेपी की रणनीति है कि राहुल गांधी को मोहब्बत के बाजार में नफरत की दुकान के रूप से साबित कर दिया जाए। तो क्या राहुल गांधी बीजेपी की रणनीति को समझ नहीं पाए और उनकी रणनीति में फंस गए ? तो क्या राहुल गांधी यह समझ नहीं पाए कि यह सब अम्बेडकर के मुद्दे से भटकाने की रणनीति थी। दरअसल राहुल गांधी पर आरोप है कि उनके धक्के में सांसद मुकेश राजपूत और प्रताप सारंगी को चोट आई हैं। दोनों सांसदों को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आईसीयू में एडमिट कराने की बात सामने आई है। क्या दोनों सांसदों को इतनी चोट लग गई कि उन्हें आईसीयू में एडमिट कराया गया है। खुद प्रधानमंत्री मोदी के दोनों सांसदों से बातचीत करने की बात सामने आई है। सभापति कह रहे हैं कि एक महिला सांसद उनके पास रोती हुई आई थी। देखने की बात यह है कि जब प्रताप सारंगी चोट को दिखा रहे थे तो निशिकांत दुबे राहुल गांधी को खरी-खोटी सुनाते दिखाई दिए। मतलब राहुल गांधी पर एक बूढ़े को घायल करने का आरोप लग जाये। बीजेपी ने अम्बेडकर के मुद्दे को पीछे धकेल दिया और राहुल गांधी के धक्का देने का मुद्दा आगे आ गया।दरअसल एकमात्र नेता राहुल गांधी ही हैं कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे पर प्रधानमंत्री को घेरते रहे हैं। बीजेपी के स्टैंड से लग रहा है कि अब राहुल गांधी से तरीके से निपटा जाएगा। इसे विपक्ष की कमजोरी कहें या फिर बीजेपी की रणनीति कि बीजेपी की सधी चाल के सामने विपक्ष कहीं टिक नहीं पा रहा है। अम्बेडकर मुद्दे पर जो विपक्ष ने सत्ता पक्ष को घेरा था, उसकी हवा बीजेपी ने धक्का कांड से निकाल दी। मतलब प्रतिपक्ष नेता को खलनायक साबित कर दिया गया। देखने की बात यह है कि निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के अलावा किसी क्षेत्रीय दल का कोई नेता राहुल गांधी के साथ खुलकर नहीं आया है। मतलब विपक्ष की एकजुटता नहीं दिखाई दी। इसी का फायदा बीजेपी उठाती है। हालांकि कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने खुद को बीजेपी सांसदों के धक्का देने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। देखने की बात यह है कि राजनीति में काफी नेताओं के बदसलूकी करते हुए मारते पीटते हुए काफी वीडियो वायरल होते रहते हैं पर राहुल गांधी के अब  तक के राजनीतिक करियर में  ऐसी कोई घटना देखने को नहीं मिलती कि जिसमें वह हिंसात्मक भूमिका में हों। वह अपनी न्याय यात्रा में नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने की बात करते रहे हैं।

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