America News : सेक्स के दाग को डॉलर से धोने में फंसे डोनाल्ड ट्रंप, अब क्लिंटन से तुलना कितनी जायज ?

डोनाल्ड ट्रंप ट्विटर से ज्यादा चर्चा में आए। और इसी ट्विटर पर उनके कारनामे भी सामने आए। घरेलू और विदेश नीति पर बिना लाग लपेट अपनी राय रखने वाले डोनाल्ड ट्रंप जाती जिंदगी रास रंग में तल्लीन होकर जीने वाले रहे हैं। लेकिन इसके लिए सत्ता का इस्तेमाल करना जी का जंजाल बन गया है।

फंस गए रे ओबामा आपने देखी होगी, लेकिन असल में फंस गए हैं डोनाल्ड ट्रंप। उनके सामने गुरुग्राम के ट्रंप टावर जैसा पहाड़ खड़ा हो गया है। न्यूयॉर्क की ग्रैंड जूरी ने उनके खिलाफ चार्जशीट तय कर दी है। ट्रंप पहले ऐसे वर्तमान या पूर्व राष्ट्रपति हैं जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इस जूरी में 23 सदस्य हैं जिसने बहुमत के आधार पर ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाया। ग्रैंड जूरी केस चलाने का फैसला करती है और ट्रायल जूरी ये तय करती है कि आरोपी दोषी है या नहीं। अंतर ये है कि ट्रायल जूरी अपना फैसला बहुमत से नहीं बल्कि सबकी सहमति से करती है। अब ट्रंप को जज के सामने पेश होना पड़ेगा और सवाल ये भी है कि क्या वो गिरफ्तार किए जा सकते हैं? डोनाल्ड ट्रंप की रंगमिजाजी उन्हें इस हद तक ले लाई है।

ट्रंप पर आरोप है कि पोर्न स्टार स्टॉर्मी डैनियल्स के साथ मामला सेट करने के लिए उन्होंने उसे एक लाख 30 हजार डॉलर का भुगतान किया। ट्रंप पहले ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होंने महाभियोग का भी सामना किया और अब आपराधिक चार्जशीट झेल रहे हैं। इससे पहले एंड्र्यू जॉनसन और बिल क्लिंटन ने ही महाभियोग झेला। लेकिन ट्रंप की तुलना क्लिंटन से ज्यादा होती है। बिल क्लिंटन की चर्चा होती है तो मोनिका लेविंस्की का नाम आ ही जाता है। 1990 के दशक के आखिर में खूबसूरत मोनिका लेविंस्की वाइट हाउस में इंटर्न थी। क्लिंटन और लेविंस्की के बीच रिश्तों की कहानियां चटकारे लेकर सुनाई जाती है। लेकिन क्लिंटन फंसे थे एक और सेक्सुअल रिलेशन में। और वो थी पाओला जोन्स।

ट्रंप ने जो किया वो भुगत रहे हैं। लेकिन अगर आप ये कल्पना कर रहे हैं कि कोर्ट में जाने के बाद उन्हें हथकड़ी लगाकर पुलिस जेल ले जाएगी तो शायद ऐसा न हो। ट्रंप अगर ये वादा करते हैं कि जब भी कोर्ट बुलाएगा वो पेश होंगे तो उन्हें जमानत मिल जाएगी।

ट्रंप की करनी

दोनों में फर्क ये है कि क्लिंटन पर अमेरिकी हितों के नुकसान का चार्ज कभी नहीं लगा। लेकिन ट्रंप की शुरुआत ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सांठगांठ और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी खुफिया एजेंसी के दखल के साथ हुई। और जब ट्रंप के वाइट हाउस से रुखसत होने का समय आया तो उन्होंने इसे अमेरिकी लोकतंत्र के काले अध्याय में तब्दील कर दिया। जब ये तय हो गया कि जो बाइडन जीत गए हैं तब भी डोनाल्ड ‘ट्रंप कार्ड’ खेलते रहे। छह जनवरी, 2021 को उनके समर्थकों ने अमेरिकी शासन के केंद्र कैपिटल हिल पर अटैक कर दिया। ट्रंप पर चुनावी नतीजे बदलवाने के लिए दबाव डालने के आरोप लगे, लेकिन जीत अंत में लोकतंत्र की हुई। अमेरिकी जनता की हुई। डोनाल्ड ट्रंप को अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी से फजीहत झेलनी पड़ी। इसके बावजूद वो अगले साल यानी 2024 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव दोबारा भाग्य आजमाने की सोच रहे थे। लेकिन प्राइमरी चुनाव की तैयारियों से पहले ही मैनहैटन की अदालत ने उन्हें झटका दे दिया है। ट्रंप ने अपने ऊपर चार्जशीट को राजनीतिक षडयंत्र करार दिया है। लेकिन अदालत के फैसले को ट्रंप की जिद से पलटा नहीं जा सकता।

जिस तरह ट्रंप पोर्न स्टार के साथ रास रंग में तल्लीन रहने के बकवास बताते आए हैं उसी तरह राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल को भी वो बकवास कहते रहे। लेकिन हुआ क्या। इसे चार पॉइंट से समझिए

1. दस दिसंबर, 2019 को जूडिशरी कमेटी ने उन पर महाभियोग लाने के आदेश दे दिए। दो आरोप थे। राष्ट्रपति की ताकत का बेजा इस्तेमाल और कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद को काम करने से रोकना।

2. 18 दिसंबर, 2019- सदन ने दो आरोपों पर महाभियोग की कार्रवाई शुरू करने के लिए वोट कर दिया।

3. 31 जनवरी 2020 – सीनेट ने 51-49 के अंतर से और गवाहों को बुलाने से मना कर दिया।

4. पांच फरवरी, 2020 – सीनेट ने उन्हें ताकत के गलत इस्तेमाल के आरोप से बरी कर दिया। वो सिर्फ चार वोट से बच गए। ट्रंप के पक्ष में 52 और उन्हें हटाने के लिए 48 वोट पड़े। अमेरिका के इतिहास में पहली बार ट्रंप की पार्टी के सीनियर लीडर मैट रॉमनी ने उनके खिलाफ वोट डाला। संसद को काम करने से रोकने का आरोप 47-53 से गिर गया और ट्रंप बच गए।

 

अब जरा बिल क्लिंटन के महाभियोग से तुलना कीजिए।

1. आठ अक्टूबर 1998 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव यानी अमेरिकी संसद के निचले सदन ने क्लिंटन पर शपथ लेकर झूठ बोलने के लिए महाभियोग की कार्रवाई शुरू की।

2. 19 दिसंबर, 1998 को क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग के दो चार्ज लगाए गए – फर्जीवाड़ा और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाना।

3. 12 फरवरी, 1999 – फर्जीवाड़े का आरोप 45-55 से खारिज हो गया और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने का आरोप 50-50 से खारिज हो गया क्योंकि एक सीनेटर ने दोनों आरोपों पर Not Proved का बटन दबाया जिसे चीफ जस्टिस ने क्लिंटन के पक्ष में माना।

क्लिंटन और ट्रंप में फर्क

अब क्लिंटन पर आरोप क्या थे? उन्होंने पाओला जोन्स को साढ़े आठ लाख डॉलर रुपए देकर आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट किया। दरअसल 1991 में अरकांसास का गवर्नर रहते हुए बिल क्लिंटन ने जोन्स को जिस्मानी रिश्ते बनाने का ऑफर दिया था। तब पाओला जोन्स अरकांसास सरकार में क्लर्क की नौकरी कर रही थी। जब लेविंस्की से क्लिंटन के रिश्ते की बात सामने आई तो लेआउट का जिक्र हुआ, लेकिन ये सरकारी फंड से नहीं किया गया था। इसके बावजूद क्लिंटन के कृत्य से अमेरिका इतना शर्मिंदा हुआ कि राष्ट्रपति की पार्टी के ही 33 सांसदों ने महाभियोग चलाने के पक्ष में वोट किया था। ऐसी स्थिति ट्रंप के समय नहीं है। रिपब्लिकन पार्टी पर ट्रंप के प्रभाव का असर जबर्दस्त है। तभी तो जब क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग चला तो 66 गवाहों को बुलाने की इजाजत दी गई। दूसरी ओर ट्रंप ने अपने किसी सीनियर साथी को पूछताछ के लिए आने नहीं दिया। ये खुद सदन की स्पीकर नैन्सी पेलोसी ने कहा था।

अब ट्रंप के ऊपर जो अब चार्जशीट बनी है वो तो सीलबंद है लेकिन कोर्ट रूम में जो आरोप लगे इसे समझिए

1. 2006 में ही पोर्न स्टार स्टॉर्मी डैनियल्स के साथ ट्रंप ने रिश्ते बनाए।

2. 2012 में डैनियल्स ने एक मैगजीन को इंटरव्यू देने का मन बनाया लेकिन ट्रंप ने उसे चेतावनी दी

3. 2016 में इलेक्शन से ठीक पहले ट्रंप ने एक लाख 30 हजार डॉलर देकर मामले को रफा दफा करने की कोशिश की।

4. ट्रंप ने अपने खास माइक कोहेन के जरिए पैसे भिजवाए और उन्होंने ही मामले का खुलासा कर दिया।

5.ट्रंप पर आरोप है कि पोर्न स्टार को दिए पैसे को उन्होंने लीगल फीस के तौर पर दर्ज कराया और झूठ बोला।

ट्रंप ने जो किया वो भुगत रहे हैं। लेकिन अगर आप ये कल्पना कर रहे हैं कि कोर्ट में जाने के बाद उन्हें हथकड़ी लगाकर पुलिस जेल ले जाएगी तो शायद ऐसा न हो। ट्रंप अगर ये वादा करते हैं कि जब भी कोर्ट बुलाएगा वो पेश होंगे तो उन्हें जमानत मिल जाएगी।

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