Agneepath Recruitment 2022 : अग्निवीरों के अभिमन्यु बनने का बना रहेगा अंदेशा!

Agneepath Recruitment 2022 : ट्रेनिंग कम समय की वजह से रणकौशल प्रभावित होने का बना रहेगा अंदेशा

Agneepath Recruitment 2022:भले ही अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों को गृह मंत्री अमित शाह केंद्रीय बलों में भर्ती होने की छूट देने की बात कर रहे हों, भले ही आम भर्ती में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की बात की जा रही हो पर अग्निवीरों के कम समय में ट्रेनिंग होने की वजह से इनका रणकौशल प्रभावित होने का अंदेशा बना रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ड्रीम योजना Agneepath Recruitment 2022अग्निपथ के तहत सेना में भर्ती होने वाले जवानों को अग्निवीर नाम दिया जा रहा है। जिस तरह से अग्निपथ योजना में सैनिकों के लिए न केवल सेवा बल्कि प्रशिक्षण में कम समय दिया गया है। इस हिसाब से तो जवानों को अग्निवीर नाम देना काफी हद तक ठीक भी बैठ रहा है।

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Agneepath Yojana के तहत छह माह की ट्रेनिंग के बाद इन अग्निवीरों को आखिर आग से ही तो खेलना है। एक तो ये जवान साढ़े सतरह साल से लेकर 21 साल की उम्र के होंगे। मतलब जवानी की दहलीज पर कदम रखेंगे।  ऐसे में जोश अधिक और होश कम होगा। दूसरे इनकी ट्रेनिंग एक साल की जगह छह महीने की रहेगी तो एक परिपक्व सैनिक बनने का भी अंदेशा बना रहेगा।

वैसे भी इन जवानों की सेवा मात्र चार साल की ही होगी तो ऐसे में युद्ध के मोर्चे पर भी पर इन्हीं अग्निवीरों के लगाने की संभावना ज्यादा रहेगी। ऐसे में किसी बड़े युद्ध में ये इन अग्निवीरों के अभिमन्यु साबित होने का अंदेशा बना रहेगा।  1991 में हुए कारगिल में नए रंगरूटों को युद्ध में झोंकने का उदाहरण भी सबके सामने है। इस युद्ध में भी ट्रेनिंग लगे सैनिकों को भी भेज दिया गया था। यही वजह थी कि कारगिल में शहीद होने वाले अधिकतर सैनिक ट्रेनिंग पीरियड के थे।

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दिलचस्प बात यह है कि रक्षा बजट बढ़ाने का हवाला देकर मोदी सरकार ने एक से महंगा एक हथियार खरीदा वहीं जवानों की भर्ती और उनकी सेवा और पेंशन के बजट में कटौती करने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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भले ही Agneepath Yojana को बेरोजगारी कम करने वाली योजना बताया जा रहा हो पर योजना पर गौर करने पर पता चलता है कि यह योजना वेतन और पेंशन के बोझ को कम करने के लिए लाई गई है। सेना में अहम् पदों पर रहने वाले कुछ पूर्व सैनिकों ने इस योजना पर चिंता भी जताई है। सेना में अहम् जिम्मेदारी संभालने वाले बीरेंद्र धनोआ ने ट्वीट किया है कि पेशेवर सेनाएं आमतौर पर रोजगारी योजनाएं चलाती … सिर्फ कह रहा हूं।

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कई सैनिकों ने विभिन्न अख़बारों में लिखे लेख में इस योजना Indian Army Recruitment 2022 से समाज के सैन्यीकरण को घातक बताया है।  इन सैनिकों ने चिंता जताई है कि जब हथियार चलाने के लिए प्रशिक्षित किये गए युवा चार साल की सेवा सेना में देकर लौटेंगे तो कानून व्यवस्था के लिए चुनौती भी बन सकते हैं। अभी तक सेना की सेवा 15-20 साल तक की होती रही है। इस योजना से नौसिखिये जवानों की संख्या बढ़ने का भी अंदेशा जताया जा रहा है।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया ने इस योजना को सशस्त्र बलों के लिए खतरे की घंटी बताया है। उनका कहना है कि इस योजना का पायलट किये बिना ही इसे लागू कर दिया गया है। उनके अनुसार कि इससे रोजगार तो मिलेगा ही साथ ही हर साल कम कम 40 हजार युवा बेरोजगार भी होंगे। Indian army recruitment 2022 की इस भर्ती से तैयार किये जाने वाले इन अग्निवीरों के हथियार चलाने में पूरी तरह से प्रशिक्षित होने पर भी अंदेशा जताया है।

Agnipath scheme protest

उधर बिहार में अग्निपत्र योजना का विरोध Agnipath scheme protest होना शुरू हो गया है। मुजफ्फरपुर, बक्सर और दानापुर में युवाओं ने एकत्र होकर इस योजना का विरोध किया है। मुजफ्फरपुर में तो सेना की भर्ती की तैयारी कर रहे युवा भर्ती बोर्ड तक पहुंच गये गये थे। दरअसल विरोध Agnipath scheme protest कर रहे इन युवाओं  का कहना है कि इन लोगों ने शारीरिक दक्षता की परीक्षा भी पास कर ली पर उनको सेना में भर्ती नहीं किया गया। दो साल से वे दर-दर की ठोंकरें खा रहे हैं। अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे युवा रेलवे ट्रैक जाम कर रहे हैं। दिल्ली हावड़ा ट्रैक जाम कर दिया गया है। छपरा, आरा, छपरा, जहानाबाद, नवादा,  बेगूसराय और मुजफ्फरपुर में युवा अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे हैं। हरियाणा और राजस्थान में भी योजना का विरोध हो रहा है। प्रदर्शनकारी ट्रेनों को ही फूंक दे रहे हैं ।

भले ही केंद्र सरकार के साथ ही बीजेपी भी अग्निपथ योजना को युवाओं का भविष्य सुधारने में बड़ा कदम बता रहे हों पर देश भर में इस भर्ती पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं। पूर्व सैन्य अधिकारी Agneepath Recruitment 2022 को लेकर खुलकर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। इस योजना के तहत भर्ती होने से पहले सेना में खाली पड़े पदों को लेकर बातें होने लगी है।

-चरण सिंह राजपूत 

 

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