अभिजीत दीपके ने ‘डर की राजनीति’ को बताया चुनौती

ऋषी तिवारी

दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन समाप्त किया। घंटों चले इस रोष प्रदर्शन के बाद मौके पर मौजूद मीडिया आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सीजेपी ने घोषणा करते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक वापस जाने का निर्देश दिया है। यह प्रदर्शन मूल रूप से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। इस आंदोलन में ताजा जान तब आई जब पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके शनिवार सुबह अमेरिका से दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन के तुरंत बाद ही जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में इकट्ठा भीड़ ने अपना आक्रोश व्यक्त किया।

 

 

गिरफ्तारी की आशंका और सोनम वांगचुक का समर्थन

 

अभिजीत दीपके की दिल्ली वापसी को लेकर पहले से ही कई अटकलें लगाई जा रही थीं। लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने भी इससे पहले आशंका जताई थी कि एयरपोर्ट पर ही सीजेपी संस्थापक की गिरफ्तारी हो सकती है। हालांकि, दीपके सुरक्षित रूप से विरोध स्थल पर पहुंच गए, जिसे छात्रों और कार्यकर्ताओं के बीच जीत के रूप में देखा गया। सोनम वांगचुक भी इस प्रदर्शन में शामिल होकर छात्रों के मुद्दों पर अपनी एकमता जाहिर करने पहुंचे थे।

 

‘डर की राजनीति’ के खिलाफ गुस्सा

 

जंतर-मंतर पर संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके काफी भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन दिन से मेरी मां-बहन रो रहे थे कि तुम वापस आ जाओगे तो ये लोग तुम्हें अंदर डाल देंगे। मेरे घर वापस आने से उन्हें डर लग रहा था। ये मेरी मां का अकेले का डर नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि इस देश में जो भी बच्चा, स्टूडेंट, युवा राजनीति के ऊपर और इस सरकार के खिलाफ बोलेगा तो उसकी मां को डर लगता है कि मेरे बेटे को कहीं ये अंदर न डाल दें। कब तक हम ऐसे डर में जिएंगे, एक बार इनको बता दो कि इनकी डर की राजनीति से हम अब नहीं डरने वाले हैं।

दीपके के ये शब्द वहां मौजूद युवाओं के बीच आग की तरह फैल गए। उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि नहीं डरेंगे नहीं डरेंगे, तुम्हारी राजनीति से नहीं डरेंगे, धर्म की राजनीति बंद करो, हिंदू-मुसलमान की राजनीति बंद करो।

 

सोशल मीडिया से सड़क तक: ‘कॉकरोच’ का अर्थ

 

इस आंदोलन को लेकर आलोचकों द्वारा उठाए गए सवालों का भी दीपके ने मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 5, 10 दिन से लोग मुझसे सवाल कर रहे थे कि सोशल मीडिया पर पेज चलाकर क्या होगा। उन लोगों को कैमरा घुमाकर ये दिखा दीजिए कि जंतर मंतर पर कितने कॉकरोच घर से बाहर निकल कर आएं हैं।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम के पीछे की सोच को समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई पारंपरिक राजनीतिक पार्टी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि ये कॉकरोच जनता पार्टी कोई प्लान की हुई पार्टी नहीं है। ये हर एक स्टूडेंट की आवाज़ है, जो सरकार से नाराज़ है।” उन्होंने कहा कि महज एक-दो दिन में इस आंदोलन के साथ लाखों स्टूडेंट्स जुड़ने वाले हैं।

 

रोजगार और जाति-धर्म की राजनीति

 

अपने संबोधन में अभिजीत दीपके ने केंद्र की शासन व्यवस्था पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 10-12 साल से इन लोगों ने हमें हिंदू- मुसलमान की राजनीति में फँसा कर रखा, इससे किसे फ़ायदा हुआ? क्या हिंदू- मुसलमान करने से देश में किसी को भी नौकरियां मिली?

उनका यह बयान देश के वर्तमान बेरोजगारी संकट और साम्प्रदायिक राजनीति के बीच के तालमेल को उजागर करता है। उन्होंने साफ किया कि अब युवा जाति और धर्म के मुद्दों से भटकाव नहीं चाहते, बल्कि उनका मुख्य मुद्दा रोजगार और शिक्षा है।

 

शांति और प्रेम का संदेश

 

विरोध प्रदर्शन के अंत में कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने समर्थकों को एक विशेष संदेश दिया। पार्टी ने कहा कि आंदोलन को हिंसा के रास्ते पर नहीं ले जाना है, बल्कि ‘आंदोलन को प्रेम और शांति से आगे बढ़ाना है।’ यह बयान उस समय आया जब दिल्ली पुलिस पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखे हुए थी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ या आंदोलन अब धीरे-धीरे एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेता हुआ दिखाई दे रहा है। अभिजीत दीपके की वापसी और जंतर-मंतर पर भारी भीड़ की उपस्थिति ने सरकार के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना यह है कि यह ‘कॉकरोच’ आंदोलन आगे किस रूप में सामने आता है और सरकार इन युवाओं की इस नई पार्टी को कितनी गंभीरता से लेती है।

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