जंतर मंतर पर पत्रकारों के लिए गाइडलाइन जारी कर मनमानी करना चाहती है दिल्ली पुलिस
गोदी मीडिया की तरह डिजिटल मीडिया को भी कंट्रोल करना चाहती है सरकार
चरण सिंह
केंद्र सरकार का बस नहीं चल रहा है नहीं तो दिल्ली में आंदोलन और पत्रकारिता दोनों पर प्रतिबंध लगा दे। एसआईआई पर हो रहे प्रोटेस्ट से सरकार बौखला गई है। गोदी मीडिया को तो सरकार ने नियंत्रण में ले रखा है पर स्वतंत्र पत्रकार और यूटूबर आंदोलन को कवर कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ज्यादती का विरोध भी कर रहे हैं। इससे दिल्ली पुलिस और सरकार दोनों की ही पोल खुल जा रही है। इसलिए जंतर मंतर पर हो रहे आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
जगजाहिर है कि दिल्ली जंतर मंतर लगातार प्रदर्शन होते रहे हैं। संसद रोड पर प्रदर्शन होते रहे हैं। जंतर मंतर तो सरकार ने बनाया ही विरोध प्रदर्शन के लिए। आंदोलन होगा तो पत्रकार भी होंगे। यह तो मोदी सरकार ही है जो अंग्रेजी हुकूमत की तरह व्यवहार कर रही है। जैसा दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर कर रखा है ऐसा तो अंग्रेज क्रांतिकारियों के खिलाफ करते थे। पहले जंतर मंतर की किलाबंदी कर दी तो अब पत्रकारों के लिए भी गाइडलाइन जारी का दी गई। पत्रकार तो अपना आई कार्ड रखते ही हैं। टांग कर क्यों रखेंगे ?
पुलिस को प्रदर्शकारियों और पत्रकारों में अंतर नहीं पता है क्या ? हर्ष यादव तो चिल्ला चिल्लाकर बोल रहा था कि वह पत्रकार है। अपना आईकार्ड भी दिखा रहा था। पुलिस ने क्या किया ? जबरन उसे हिरासत में ले रही थी ? क्या रोजी ने अपना आईकार्ड नहीं दिखाया था विवेक भगत ने जानबूझकर गन्दी हरकत की। थोड़ी बहुत गाइडलाइन दिल्ली पुलिस के भी भी जारी कर लो। बिना बैच के पुलिसकर्मी कौन हैं ? स्पोर्ट शूज में पुलिस कर्मी कौन है ? दाढ़ी रखे हुए बड़ा डंडा रखे बिना बैच के पुलिसकर्मी कौन है ? मतलब गोदी मीडिया तो सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन को दिखाएगा नहीं। स्वतंत्र पत्रकारों और यूट्यूबर को ही नहीं जाने देंगे। यह आज़ादी की दूसरी लड़ाई है। यह इन हथकंडों से नहीं रुकेगी।
दरअसल 5 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। जिसमें पुलिस ने कहा है कि पत्रकारों को प्रदर्शन के दौरान वैध पहचान पत्र रखना चाहिए और उसे हमेशा दिखाकर रखना चाहिए ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियां उनकी पहचान कर सकें।
पुलिस द्वारा जारी AI इमेज वाले पोस्टर में 4 बिंदु बताए गए हैं:1. वैध ID कार्ड साथ रखें: सभी पत्रकारों को अपनी संस्था द्वारा जारी वैध प्रेस कार्ड और/या PIB/DIP का एक्रेडिटेशन कार्ड रखना होगा।
2. कार्ड हमेशा दिखाकर रखें: साइट पर मौजूद पुलिस को पहचान में आसानी हो, इसके लिए ID कार्ड हर समय visibly displayed होना चाहिए।
3. पुलिस ऑपरेशन में बाधा नहीं: पत्रकारों की मौजूदगी या गतिविधि से पुलिस ऑपरेशन या जवानों की मूवमेंट में बाधा नहीं आनी चाहिए।
4. सुरक्षित दूरी बनाए रखें: तनावपूर्ण स्थिति में पत्रकारों को उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और खुद को प्रदर्शनकारियों से अलग दिखाना चाहिए।
पुलिस का कहना है कि इसका मकसद पत्रकारों की पहचान आसान बनाना और उन्हें पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप से बचाना है। यह गाइडलाइन ऐसे समय में आई है जब दिल्ली पुलिस पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन की कवरेज के दौरान 3 महिला पत्रकारों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर पहचान पत्र चेक करना समझा जा सकता है, लेकिन “कैसे कवर करें, कितनी दूरी रखें” जैसी बातें पुलिस नहीं, बल्कि न्यूजरूम और प्रेस बॉडी तय करती हैं।