विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश और पंजाब के प्रदेश बदल दिए हैं। कांग्रेस ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। ऐसे ही पंजाब में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह परगट सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस ने यूपी में ब्राह्मण-मुस्लिमों को साधने के लिए प्रदेश अध्यक्ष बदला है तो पंजाब में गुटबाजी खत्म करने के लिए परगट सिंह को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है।
दरअसल कांग्रेस के इस फेरबदल से उत्तर प्रदेश और पंजाब में कांग्रेस की स्थिति मजबूत होगी पर काम समय में संगठन बनाने और विश्वास जीतने की बड़ी चुनौती है। आराधना मिश्रा के नेतृत्व से पूर्वांचल तो इमरान मसूद की मुस्लिमों में पकड़ का फायदा विधानसभा चुनाव में मिलेगा। आराधना मिश्रा के पिता प्रमोद तिवारी कांग्रेस के बड़े नेता हैं तो इमरान मसूद परिवार पुराना राजनीतिक परिवार है इमरान मसूद के दादा रशीद मसूद बड़े समाजवादी नेता रहे हैं।
पंजाब में अंदरूनी कलह और गुटबाजी से निपटने तथा आगामी चुनावी रणनीति को धार देने के लिए परगट सिंह को कमान दी गई है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने और विपक्ष के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है, वहीं सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है।
कांग्रेस के इस बदलाव से न केवल संगठन मजबूती पर काम होगा बल्कि नई टीम बनाकर नया जोश भरने का प्रयास भी होगा। नई टीम में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश होगी।
आराधना मिश्रा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वह रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं। उनका राजनीतिक सफर सिर्फ परिवार की राजनीतिक पहचान तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने ब्लॉक स्तर की राजनीति से शुरुआत की और ब्लॉक प्रमुख की जिम्मेदारी भी संभाली। 2014 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने 2017 और 2022 में भी रामपुर खास सीट पर जीत दर्ज की. कांग्रेस के संगठन और चुनावी अभियानों में भी वह लगातार सक्रिय रही हैं।आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का एक अहम पहलू उनका ब्राह्मण चेहरा होना है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं का अपना महत्व रहा है. ऐसे में कांग्रेस ने एक ब्राह्मण महिला नेता को प्रदेश संगठन की कमान देकर इस वर्ग तक अपनी राजनीतिक पहुंच मजबूत करने का संकेत दिया है। इससे पहले रीता बहुगुणा जोशी लंबे समय तक यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं। अब करीब डेढ़ दशक बाद पार्टी ने एक बार फिर ब्राह्मण महिला नेता को प्रदेश की कमान सौंपी है।
दूसरी तरफ सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ मुस्लिम समाज को भी संगठन में प्रमुख प्रतिनिधित्व दिया है। इमरान मसूद पश्चिमी यूपी की राजनीति में जाना-पहचाना नाम हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे। इसके बाद उनका राजनीतिक सफर कई मोड़ से गुजरा। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सहारनपुर से जीत दर्ज की। अब पार्टी संगठन में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को मजबूत करने की कोशिश की है।
आराधना मिश्रा और इमरान मसूद की नियुक्ति के बाद कांग्रेस की नई टीम में ब्राह्मण और मुस्लिम प्रतिनिधित्व सबसे ज्यादा चर्चा में है। दोनों नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है, लेकिन अपनी-अपनी सामाजिक पहुंच के लिहाज से दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से अपने पुराने सामाजिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में ब्राह्मण और मुस्लिम समाज के बीच पार्टी की मौजूदगी बढ़ाना उसके लिए एक अहम राजनीतिक लक्ष्य हो सकता है। हालांकि सिर्फ संगठन में प्रतिनिधित्व मिलने से किसी सामाजिक वर्ग का समर्थन अपने आप हासिल नहीं होता. कांग्रेस के सामने चुनौती यह होगी कि वह इन नियुक्तियों को बूथ स्तर के संगठन, स्थानीय नेताओं और चुनावी मुद्दों से कैसे जोड़ती है।
कांग्रेस की नई टीम में सिर्फ ब्राह्मण और मुस्लिम प्रतिनिधित्व ही नहीं है। देवेंद्र निषाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि आलोक प्रसाद को भी यही जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी ने ओबीसी और दलित वर्ग को भी संगठन में जगह दी है। यह व्यवस्था समाजवादी पार्टी के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण से भी जुड़ी दिखाई देती है। कांग्रेस और सपा पहले से इंडिया गठबंधन का हिस्सा रहे हैं और 2027 के चुनाव को देखते हुए दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। ऐसे में कांग्रेस की नई टीम का सामाजिक संतुलन सपा के साथ उसके राजनीतिक तालमेल में भी भूमिका निभा सकता है।
इमरान मसूद की नई जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका राजनीतिक प्रभाव और सपा के साथ उनका पुराना जुड़ाव दोनों दलों के बीच बातचीत में काम आ सकता है। वहीं आराधना मिश्रा और प्रमोद तिवारी का सपा नेतृत्व के साथ राजनीतिक संवाद भी किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में कांग्रेस ने संगठन में ऐसे नेताओं को आगे किया है, जिनकी अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक हलकों में पहुंच है।
कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन सामाजिक समीकरणों को जमीन पर उतारने की है. ब्राह्मण चेहरे के तौर पर आराधना मिश्रा और मुस्लिम चेहरे के तौर पर इमरान मसूद को बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। लेकिन इसका असर चुनाव में कितना दिखाई देगा, यह संगठन की सक्रियता और स्थानीय स्तर की राजनीति पर निर्भर करेगा। कांग्रेस के लिए 2027 का चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि उसे उत्तर प्रदेश में अपना संगठन दोबारा मजबूत करना है. नई टीम के सामने एक तरफ ब्राह्मण और मुस्लिम जैसे पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को साधने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ दलित और ओबीसी वर्ग को साथ जोड़ने की कोशिश भी करनी होगी।