युवाओं नहीं बल्कि अपनी अपनी पार्टियों के लिए काम करते हैं छात्र संगठन!
चरण सिंह
एबीवीपी कोई बीजेपी का प्रकोष्ठ तो है नहीं। यह तो आरएसएस का प्रकोष्ठ है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तो जेन जी से संवाद करने की पैरवी कर रहे हैं। वह तो जंतर मंतर पर हुए जेन जी के आंदोलन को सही बताते हुए आंदोलनकारियों से संवाद में देरी के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे थे। वह अपनी पीढ़ी से अधिक आज की पीढ़ी को देशभक्त और संवाद की पक्षधर बता रहे हैं। मोहन भागवत यह दर्शाने की कोशिश कर रहे थे कि सरकार किसी की हो पर वह युवाओं के साथ हैं। मोहन भागवत यह बताएं कि क्या कभी आरएसएस या उसके किसी प्रकोष्ठ ने बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है ?
ऐसी ही स्थिति कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों की है। इन लोगों को दिल्ली जंतर मंतर तो युवाओं की समस्या दिखाई दे रही थी पर झारखंड में नहीं। सभी पार्टियों को जमीनी मुद्दों पर काम करना पड़ेगा नहीं तो फिर सीजेपी और दूसरे नए संगठन देश में राजनीति करेंगे। फिर स्थापित राजनीतिक दल सिमट जाएंगे। आखिरकार यदि राजनीतिक दलों के छात्र संगठन काम करते तो फिर सीजेपी का आंदोलन इतना बड़ा कैसे होता ? क्यों सीजेपी को आंदोलन करना पड़ता ? हां थोड़ा बहुत काम वामपंथी छात्र संगठन जरूर कर लेते हैं।
आरएसएस की एबीवीपी झारखंड आंदोलन में तो पहुंच गई पर दिल्ली धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में कहीं नहीं दिखाई दी। मतलब आरएसएस और उसके सभी प्रकोष्ठ बस बीजेपी के लिए काम करते हैं। यदि ऐसा नहीं है तो मोहन भागवत पीएम मोदी और गृह अमित शाह से बोलें कि वह जेन जी से सलाह मशवरा कर ही कोई निर्णय लें।
मोहन भागवत क्या दिल्ली जंतर मंतर पर हुए आंदोलन में छात्रों के साथ की गई ज्यादती के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांगेंगे ? नहीं न। आरएसएस का काम तो बस बीजेपी को मजबूत करना है। उसे न देश से मतलब है और न समाज से।
मोहन भागवत युवाओं से संवाद करने का ड्रामा इसलिए करना पड़ा क्योंकि क्योंकि दिल्ली जंतर मंतर पर सीजेपी के आंदोलन के बाद बीजेपी दतिया कर बांकीपुर दोनों उप चुनाव हार गई। बांकीपुर सीट तो बीजपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की थी। तीन बार नितिन नवीन यहां से विधायक रहे तो 5 बार इनके पिताजी। खुद इनके बूथ पर बीजेपी हार गई। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के बूथ पर भी पार्टी हार गई। अब जब पीएम मोदी और गृह मंत्री के हाथ से मामला निकल गया तो युवाओं को साधने के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लगाया गया है।
बीजेपी का खेल है कि अंदरखाने बीजेपी विरोधी युवाओं पर शिकंजा कसा जाता रहे और बाहर से युवाओं को साधने की कोशिश करते रहो। बीजेपी और आरएसएस की बेचैनी यह है कि जिस यूथ के बल पर वह 2014 से सत्ता का सुख भोग रहे हैं। जो युवा दिन भरा मोदी मोदी कहता नहीं थकता था। जो युवा मोदी के खिलाफ एक भी शब्द सुनना पसंद नहीं करता था वह युवा मोदी को भद्दी भद्दी गलियां दे रहा है। मतलब अब युवा मोदी के बहकावे नहीं आ रहे हैं।







