20 जुलाई को सीटू, सीपीआई(एम) और जनवादी महिला समिति, गौतमबुद्धनगर के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कॉमरेड गंगेश्वर दत्त शर्मा, राम स्वारथ, अनुराग सक्सैना, ईश्वर त्यागी, बृजेश कुमार, अरुण कुमार पटेल, राम सागर, आशा यादव, रेखा चौहान, गुड़िया देवी, इशरत, चन्दा बेगम, बेबी के नेतृत्व में जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर आयोजित देशव्यापी संसद मार्च / प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस द्वारा की गई तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई का कड़े शब्दों में विरोध किया।
जैसा कि आप जानते हैं, पर्यावरणविद् और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने ज़बरदस्ती हिरासत में लेकर धरना स्थल से हटा दिया था। श्री वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, NEET पेपर लीक और देश की शिक्षा व्यवस्था की पूरी तरह से विफलता के लिए जवाबदेही की मांग को लेकर 21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उन्हें जबरन अस्पताल में भर्ती करना और पुलिस द्वारा धरना स्थल खाली करवाना घोर तानाशाही है।
मुख्य मांगें:
1. विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत इस्तीफा दें! 2. NTA को भंग किया जाए – छात्रों युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाली शिक्षा व्यवस्था नहीं चलेगी! 3. भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बचाओ! 4. माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करें।
इस अवसर पर सीटू जिला सचिव गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि “सरकार द्वारा चल रहे छात्र-युवा आंदोलन को कुचलने की कोशिश की जा रही है। हम इस आंदोलन के प्रति पूरी एकजुटता व्यक्त करते हैं और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों और युवाओं का पूर्ण समर्थन करते हैं। शिक्षा सबका अधिकार है, कोई उपकार नहीं!”
सरकार ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए, बसें रोक दी गईं, जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई। इसके बावजूद भी लाखों की संख्या में छात्र, युवा, मजदूर और महिलाएं जंतर-मंतर पर पहुंचे। पुलिस द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कई बार लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसमें सैकड़ों लोग घायल हुए। सीटू गौतमबुद्धनगर इस बर्बर दमन की घोर निंदा करता है।
सीटू की मांग है कि घायल प्रदर्शनकारियों का समुचित इलाज कराया जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।





