बिना आंदोलन के नहीं हराया जा सकता बीजेपी को 

चरण सिंह 

अब तो प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी भी कह रहे हैं कि बीजेपी को हराने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा। नई तरह की राजनीति करनी पड़ेगी। बिना त्याग पालिदान के परिवर्तन होना मुश्किल है। तो क्या क्षेत्रीय दल राहुल गांधी की इस बात से सहमत हैं। क्या क्षेत्रीय दल राहुल गांधी की अगुआई में आंदोलन करने जा रहे हैं। क्या विपक्ष के नेताओं में संघर्ष का दम है। राहुल गांधी ने तो भारत जोड़ो यात्रा निकालकर अपने को साबित किया है। उनकी फिटनेस लम्बा संघर्ष करने की है। कांग्रेस विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़कों पर है।

नीट परीक्षा लीक मामले में एनएसयूआई आंदोलनरत है। क्षेत्रीय दलों का रवैया बड़ा निराशजनक है। अधिकतर दल जातीय आंकड़ों पर चुनाव जीतने का सपना देख रहे हैं। बिना जनहित के मुद्दों को उठाये बिना कोई राजनीति नहीं कर सकता है। अब किसी का कोई वोटबैंक स्थाई नहा रहा है। जातीय आंकड़ों पर अब चुनाव नहीं जता जा सकता है। जनता को विश्वास में लेना होगा। विपक्ष को मिलकर बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा। यही कांग्रेस कह रही है। नहीं तो क्षेत्रीय दल यह समझ लें कि शिवसेना, एनसीपी, अकाली दल, आप और टीएमसी जैसा हाल दूसरे क्षेत्रीय दलों का होगा। वैसे भी अब क्षेत्रीय दल सिमटते जा रहा है। ये दल सीधे जनता से नहीं जुड़ पा रहे हैं।
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