वर्तमान टीम में कार्यरत 11 में से आधी महिला पदाधिकारियों की जगह नए चेहरों को जगह दी जाएगी। इस बहाने बीजेपी जहां नए तेवर के साथ संगठन की चुनावी धार बढ़ाएगी, वहीं महिलाओं को मौका देकर दूसरे दलों को भी संदेश देने की कोशिश करेगी। उत्तर प्रदेश की इकाई में महिलाओं की संख्या तीन से चार तक की जाएगी।
नए चेहरों को संगठन में मिल सकता है मौका
आगामी चुनावों को देखते हुए समीकरण साधने का प्रयास
जून के पहले हफ्ते में प्रदेश इकाई, छह क्षेत्रीय अध्यक्ष तथा निगमों, आयोगों और बोर्ड के पदाधिकारियों की घोषणा की जाएगी. सदन में एक तिहाई भागीदारी देने के वातावरण के बीच महिलाओं के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने का राग छेड़ने वाली बीजेपी पर अब उन्हें संगठन में भी वरीयता देने का दबाव है।
भूपेंद्र चौधरी के नेतृत्व में थीं 11 महिलाएं
दो पदाधिकारियों को उपाध्यक्ष से लेकर महामंत्री तक कोई भूमिका दी जा सकती है. प्रदेश इकाई ने ऐसी लगभग 12 महिलाओं की सूची बनाई है, जिनके पास चुनाव और संगठन का अनुभव है। पार्टी पढ़ी-लिखी व कुशल महिला वक्ताओं को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रही है. पिछले दिनों नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लोकसभा में गिरने के बाद बीजेपी ने महिलाओं के नेतृत्व में प्रदेशभर में जन आक्रोश अभियान चलाया था।
कई बड़े पदाधिकारियों की बदलेगी भूमिका
मौजूदा प्रदेश इकाई के 18 उपाध्यक्षों में राज्यसभा की पूर्व सदस्य मेरठ निवासी कांता कर्दम लंबे समय से संगठन में कार्यरत हैं। आजमगढ़ की नीलम सोनकर भी लालगंज सुरक्षित सीट से सांसद रही हैं। दोनों की भूमिका में बदलाव होने की संभावना है. गाजियाबाद की सुनीता दयाल महापौर है, जबकि कानपुर की कमलावती सिंह महिला कल्याण निगम की अध्यक्ष हैं। ऐसे में दोनों का बदला जाना भी तय माना जा रहा है।
सात महामंत्रियों में पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत हैं, जिन्हे पार्टी संगठन से मुक्त कर चुनाव मैदान में उतार सकती है या फिर संगठन में उनकी भूमिका बदल सकती है। 16 प्रदेश मंत्रियों में छह महिलाएं हैं, जिनमें आगरा की अंजुला सिंह माहौर, वाराणसी की मीना चौबे, प्रयागराज की अनामिका चौधरी, मऊ की शकुंतला चौहान, लखनऊ की अर्चना मिश्रा व अलीगढ़ की पूनम बजाज का नाम शामिल है।
वर्तमान टीम में कार्यरत 11 में से आधी महिला पदाधिकारियों की जगह नए चेहरों को जगह दी जाएगी. इस बहाने बीजेपी जहां नए तेवर के साथ संगठन की चुनावी धार बढ़ाएगी, वहीं महिलाओं को मौका देकर दूसरे दलों को भी संदेश देने की कोशिश करेगी. उत्तर प्रदेश की इकाई में महिलाओं की संख्या तीन से चार तक की जाएगी।








