रीवा में संयुक्त किसान मोर्चे ने जलाईं एमएसपी आदेश की प्रतियां

रीवा  संयुक्त किसान मोर्चे के राष्ट्रीय आवाहन पर रीवा एसकेएम ने 2026-27 के खरीफ फसलों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य की कड़ी निंदा कर कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार के किसान विरोधी चरित्र को उजागर करता है। मोर्चे के नेता शिव सिंह ने कहा कि भाजपा ने 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार सी2+50% की दर से एमएसपी देने का वादा किया था लेकिन मोदी मंत्रिमंडल ने एमएसपी की घोषणा व्यापक उत्पादन लागत से लगभग 30 प्रतिशत कम की है। धान फसल जो सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल है उसका एमएसपी 2441रुपये प्रति क्विंटल तय किया जबकि सी2+50% के अनुसार 3243 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए था। इसका अर्थ है कि किसानों को प्रति क्विंटल 802 रुपए का नुकसान हुआ। पूरे देश के किसानों को केवल 20 फसलों पर लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ेगा। मोदी सरकार ने अमेरिकी साम्राज्यवाद और WTO के सामने आत्मसमर्पण करते हुए यह तर्क स्वीकार कर लिया है कि सब्सिडी बाजार विकृति पैदा करती है। जिससे भारत में कृषि संकट और गहरा हुआ है।सरकार स्वामीनाथन आयोग की सी2+50% सिफारिश का खुला उल्लंघन कर रही है।आज देश का किसान MSP से कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर है। उर्वरकों की कमी पहले ही शुरू हो चुकी है और जमाखोर काला बाजारी के माध्यम से भारी मुनाफा कमा रहे हैं। NCRB के ताजा आंकड़े बताते हैं कि गंभीर कृषि संकट के कारण किसानों की आत्महत्याएं लगातार जारी हैं। इस संकट से निकलने का एक रास्ता यह है कि MSP को व्यापक उत्पादन लागत का डेढ़ गुना घोषित किया जाए। एमएसपी की लड़ाई भारत की संप्रभुता की रक्षा की लड़ाई है। मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के किसान विरोधी विश्वासघात को उजागर करने एमएसपी आदेश की प्रतियां जलाकर संयुक्त किसान मोर्चा इकाई रीवा ने अग्रसेन चौक में विरोध प्रदर्शन किया। दौरान विरोध प्रदर्शन मोर्चे के नेता उमेश पटेल जिला पंचायत सदस्य लालमणि त्रिपाठी इंद्रजीत सिंह शंखू शोभनाथ कुशवाहा शिवराम सिंह सतना संतकुमार पटेल सुग्रीव सिंह रामनरेश सिंह पुष्पेंद्र सिंह एड संजय निगम फौजी यदुवंश प्रताप सिंह राजेश पटेल रामदेव सिंह धर्मेंद्र सिंह नेत्रराज सिंह आदि उपस्थित रहे।

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