मलेशिया सरकार की इमीग्रेशन रेड के डर से करनाल के एक दंपती ने क्वालालंपुर की एक बिल्डिग़ की दसवी मंजील से लगा दी थी छलांग
मौके पर ही दम तोड़ दिया था पत्नी ने दम, गंभीर चोट लगने से कौमा में गया था दलित युवक
15 दिन के भीतर परिजनों से मिला कोमा में पहुंचा युवक

बताया जा रहा कि जब इमीग्रेशन टीम ने पुलिस को लेकर छापामारी की तो इसकी जानकारी जब इस दंपति को लगी, तो वे गिरफ्तारी के डर से दसवी मंजिल से कूद गए, जिस कारण उसकी पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई और जब कि कपील इस हादसें में गंभीर चोटे लगने से कोमा में चला गया। वहां की पुलिस ने उसकी पत्नी के शव को वहां के सरकारी अस्पताल के मोर्चरी हाऊस में रखवा दिया और कपिल को गंभीर अवस्था में उपचार के लिए दाखिल करा दिया।

जानकारी के अनुसार वहां के डाक्टरों की टीम ने कपिल को आईसीयू में दाखिल कर उसका उपचार शुरू कर दिया। इस हादसे की सूचना किसी तरह से कपिल के परिवार तक पहुंची। जिसे सुनकर उनके होश उड़ गए और हाथ पैर फूलने लगे, उन्हें डर सताने लगा कि आखिरकार वे अपने बेटे के पास जाएं तो जाएं कैसे, क्यों कि उनके पास ना तो पासपोर्ट था और ना ही इतने पैसे थे कि वो उसकी मदद कर सकें।
बताया गया है कि इस दौरान मलेशिया से एक एनजीओं की संचालक का फोन आता है और वो उन्हें उसकी सहायता का आश्वासन देती है और अस्पताल में दाखिल उनके बेटे का विडियो बनाकर उनके पास भेज देते है तथा दावा करते है कि उनकी एनजीओं उनके बेटे का उपचार करवा रही है और उन्हें तुरंत दो लाख रुपए की जरूरत है। इधर गरीब-बेसहारा परिवार इस एनजीओ के झांसे में आ जाता है और कर्जा लेकर एक लाख अस्सी हजार रुपए उस एनजीओ को ओनलाईन भेजे देता है।

आरोप है कि एनजीओ वालों ने पैसे मिलने के बाद मात्र 70 हजार रुपए अस्पताल में जमा कराए और बाकी पैसे स्वयं रख लिए। इस बात का पता चलते ही कपील का पूरा परिवार बुरी तरह से परेशान हो गया, क्योंकि वहां की एनजीओ ने उन से पैसे लेकर उनके बेटे का उपचार भी नहीं कराया जा रहा।
इधर ये भी बताया गया कि बुरी तरह से परेशान परिवार ने मदद के लिए स्थानीय नेताओं से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें यहां भी कोई मदद नहीं मिली।
इसके बाद कपिल का भाई दीपक अपने जीजा मुकेश को लेकर अपने परिचित वरिष्ठ पत्रकार विकास सुखीजा से मिलता है। दोनों जीजा साले का साफ तौर पर कहना है कि जैसे ही वे पत्रकार विकास सुखीजा से मिले तो उनकी मदद के लिए उन्होंने अपनी ओर से पूरा योगदान देने का आश्वासन दिया।
जिस के बाद तुरंत बाद ही विकास सुखीजा ने इस परिवार की मदद के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मत्री नायब सिंह सैनी व केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल नाम एक पत्र लिखा।
जिसके तुरंत बाद उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री निवास पर सीएम से मिलने का समय मांगा और सीएम हरियाणा के स्टाफ ने भी तुरंत उन्हें चण्डीगढ़ सीएम साहब से मिलने के लिए बुला लिया।
अगले ही दिन पत्रकार विकास सुखीजा के नेतृत्व में पीड़ित परिवार व गांव के सरपंच लखविंदर सिंह की माननीय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात हुई और मुख्यमंत्री ने उन्हें हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया और कार्यवाही आरंभ कर दी।
इस के बाद पत्रकार विकास सुखीजा ने करनाल में अचानक आए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल जी से मिलकर उन्हें इस घटना से अवगत कराया तो उन्होंने भी तुरंत मदद करने का आश्वासन दिया और देखते ही देखते 5 दिन के भीतर उसकी पत्नी का शव स्वदेश मंगवा दिया और मात्र 15 दिन के भीतर कपिल को भी इंडिया लाया गया। इधर कपिल को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया, जहां पर उसकी कई सर्जरी हुई है।
कपिल की माता का कहना है कि उन्हें किसी भी प्रकार की कोई भी उम्मीद नहीं थी कि उनकी इतनी तेजी से मदद हो जाएगी, उन्होंने पत्रकार विकास सुखीजा के बारे में बताया कि वे उनके परिवार के लिए भगवान के रूप में आगे आए। आज हमारे हमें मिल गया है और उसका इलाज कराया जा रहा है।
इधर वरिष्ठ पत्रकार विकास सुखीजा व कपिल के परिवार ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल व हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का बहुत-बहुत धन्यवाद किया है और ईश्वर से प्रार्थना कि है कि ऐसे नेता सभी को मिलें।







