पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व Twitter) पर इजरायल के खिलाफ तीखा पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने इजरायल को “evil” (शैतान), “curse for humanity” (मानवता के लिए अभिशाप) और “cancerous state” (कैंसर जैसी राज्य) बताया। साथ ही उन्होंने लेबनान में इजरायल की कार्रवाई को “genocide” करार दिया और उन लोगों के लिए “burn in hell” जैसी अपमानजनक टिप्पणी की, जिन्होंने फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल बनाया।
यह पोस्ट उस समय आया जब इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता (ceasefire talks) चल रही थी, और इजरायल लेबनान पर हमले कर रहा था।
इजरायल की प्रतिक्रिया
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस बयान को “outrageous” (अत्यंत आपत्तिजनक) बताया और कहा कि इजरायल के विनाश की ऐसी भाषा किसी भी सरकार से बर्दाश्त नहीं की जा सकती, खासकर उससे जो खुद को शांति का neutral mediator (तटस्थ मध्यस्थ) बताती हो। इजरायली विदेश मंत्री ने इसे “blatant antisemitic blood libels” (स्पष्ट यहूदी-विरोधी झूठा आरोप) कहा।
इसके बाद ख्वाजा आसिफ को अपना पोस्ट डिलीट करना पड़ा। कई भारतीय मीडिया आउटलेट्स (जैसे आज तक, न्यूज18, अमर उजाला) ने इसे “नेतन्याहू की धमकी के बाद पाकिस्तान का झुकना” या “सरेंडर” बताया है।
वास्तविकता क्या है?
यह धमकी नहीं, बल्कि कूटनीतिक फटकार (diplomatic rebuke) थी। इजरायल ने सीधे पाकिस्तान को चेतावनी नहीं दी, बल्कि पाकिस्तान की मध्यस्थता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। पाकिस्तान और इजरायल के बीच कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं, इसलिए इजरायल का सार्वजनिक जवाब देना खुद में असामान्य था।
पोस्ट डिलीट करने का कारण मुख्य रूप से कूटनीतिक दबाव और इस्लामाबाद वार्ता में पाकिस्तान की neutality पर पड़ने वाले असर को कम करना माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि आसिफ ने पोस्ट शराब के नशे में किया था (हालांकि यह पुष्टि नहीं है)।
यह घटना ईरान-इजरायल तनाव और अमेरिका-ईरान ceasefire के बीच हुई है। पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन ऐसे बयान उसकी इस भूमिका को कमजोर करते हैं। इजरायल के लिए यह मौका था कि वह पाकिस्तान जैसे देश की मध्यस्थता पर सवाल खड़ा करे, जो ऐतिहासिक रूप से इजरायल-विरोधी रहा है।








