ट्रंप की उंगली पर नाच रहे थे शहबाज, सीजफायर को बेताब अमेरिका ने डील के लिए भेजा!

ईरान-अमेरिका के बीच हुए दो सप्ताह के सीजफायर में पाकिस्तान खुद को शांतिदूत के तौर पर पेश कर रहा है और वाहवाही लूटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के साथ अस्थायी युद्ध विराम की कोशिशों में अमेरिका ने पाकिस्तान को एक अहम बैकचैनल के तौर पर इस्तेमाल किया।

 

पाक को बनाया ‘मैसेंजर’

 

लंदन स्थित अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के साथ सीधी बातचीत के बजाय पाकिस्तान के जरिए अपनी बात पहुंचाई। अमेरिका ने पाकिस्तान को एक तरह से ‘मैसेंजर’ की भूमिका में रखा, जो उसकी शर्तों और प्रस्तावों को ईरान तक पहुंचा सके. इसके पीछे शायद रणनीति यह थी कि एक मुस्लिम बहुल पड़ोसी देश के जरिए भेजा गया मैसेज ईरान के लिए ज्यादा स्वीकार्य हो सकता है. हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की कूटनीतिक स्वतंत्रता पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

 

सामने आया कूटनीतिक खेल

 

कई हफ्तों तक चला एक बेहद गोपनीय कूटनीतिक खेल अब सामने आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान को संघर्ष विराम के लिए मनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान को सौंपी थी और इस पूरी कवायद में इस्लामाबाद एक अहम “बैक-चैनल” के तौर पर काम करता रहा। अमेरिका चाहता था कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और लड़ाई रोकने के लिए तैयार हो जाए। इसके लिए पाकिस्तान की मुस्लिम बहुल पड़ोसी देश वाली पहचान को एक रणनीतिक बढ़त के रूप में इस्तेमाल किया गया, ताकि अमेरिकी प्रस्ताव तेहरान के लिए ज्यादा स्वीकार्य बन सके।

इस पूरी कोशिश की कमान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने संभाली। उन्होंने अमेरिकी शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा .समय सीमा नजदीक आने पर मुनीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से सीधे बातचीत की. इसी दौरान पाकिस्तानी अधिकारी वॉशिंगटन और तेहरान के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान करते रहे।

 

पाक ने ईरान तक पहुंचाई अमेरिकी 15 सूत्रीय योजना

 

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका की तरफ से तैयार 15-सूत्रीय योजना ईरान तक पहुंचाई, जबकि तेहरान की ओर से 5 और 10 बिंदुओं वाले जवाबी प्रस्ताव भी अमेरिका तक पहुंचाए गए. लगातार बैक-चैनल बातचीत के बाद ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ पहलुओं पर सीमित रियायत देने को तैयार होता नजर आया.आखिरकार, इन कूटनीतिक प्रयासों का नतीजा दो हफ्तों के युद्धविराम के रूप में सामने आया, जिसकी घोषणा अमेरिका, ईरान और इजरायल ने की, हालांकि इस दौरान ट्रंप की सार्वजनिक बयानबाजी काफी सख्त रही और उन्होंने चेतावनी दी कि शर्तें न मानने पर ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

 

व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद शहबाज ने किया था पोस्ट

 

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का सार्वजनिक रुख भी अमेरिका के साथ काफी हद तक मेल खाता रहा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा ट्रंप की समयसीमा बढ़ाने की अपील वाला सोशल मीडिया पोस्ट व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद ही जारी किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पोस्ट ऐसे समय में आया, जब ट्रंप की तय डेडलाइन करीब थी और पाकिस्तान दोनों पक्षों के लिए एक ‘एग्जिट रास्ता’ तैयार करने की कोशिश कर रहा था। इससे यह संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे कूटनीतिक तालमेल कहीं ज्यादा गहरा था, जबकि सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी अलग अंदाज में जारी रही।

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