आम जनता की फरियाद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक न पहुंचे, इसके लिए पुलिस किस हद तक जा सकती है, इसका एक बेहद शर्मनाक और अमानवीय चेहरा शुक्रवार को नारनौल के पंचायत भवन में देखने को मिला. जमीन पर कब्जे की शिकायत लेकर भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मबीर सिंह से मिलने पहुंची महिलाओं को पुलिस ने सरेआम बदसलूकी करते हुए और घसीटते हुए बाहर निकाल दिया.
जानकारी के अनुसार, फरियादी दीपक और उनके परिवार का आरोप है कि उनके पड़ोसी द्वारा उनकी जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है. न्याय के लिए यह परिवार पहले शहर पुलिस थाने गया था, लेकिन आरोप है कि वहां उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई. थाने से निराश होकर दीपक और उनके परिवार की महिलाएं शुक्रवार को अपनी गुहार लेकर सांसद धर्मबीर सिंह और उपायुक्त (DC) कैप्टन मनोज कुमार से मिलने पंचायत भवन पहुंच गई थीं.
रोती-चिल्लाती रहीं महिलाएं, नहीं पसीजा पुलिस का दिल
पंचायत भवन में सांसद और अन्य अधिकारी एक बैठक में व्यस्त थे. बैठक खत्म होने के बाद जैसे ही वीआईपी (VIP) बाहर आने लगे, पीड़ित महिलाओं ने अपनी शिकायत बताने के लिए उनकी तरफ बढ़ने की कोशिश की.
सच्चाई और थाने की नाकामी वीआईपी तक न पहुंच जाए, इसे रोकने के लिए वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया. पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को बेरहमी से पकड़कर घसीटना शुरू कर दिया और उन्हें धक्के मारते हुए बाहर निकाल दिया. इस दौरान महिलाएं लगातार रोती और चिल्लाती रहीं, लेकिन किसी भी पुलिसकर्मी को उन पर तरस नहीं आया.
घर जाकर मारपीट करने का गंभीर आरोप
पीड़ित परिवार का दर्द पंचायत भवन में ही खत्म नहीं हुआ. पीड़ितों ने पुलिस पर और भी गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि शुक्रवार शाम को पुलिसकर्मियों की एक टीम उनके घर पहुंच गई. आरोप है कि पुलिस ने अपनी ताकत का रौब दिखाते हुए परिवार के सदस्यों को थप्पड़ जड़े और उनके साथ मारपीट की.
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और आम जनता के प्रति उसके रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह है कि क्या प्रशासन और सरकार इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई सख्त कार्रवाई करते हैं या नहीं.








