कितना जायज था अजय प्रताप को नौकरी से निकालना ? पुलिस एनकाउंटर में आरोपी के दोनों पैरों में लगी गोली
चरण सिंह
नोएडा। क्या अपने ही अधिकारियों को गोली मारकर हत्या करने के बाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना इतना आसान है ? क्या इस तरह की घटना शौकिया की जा सकती है ? क्या ये दोनों अधिकारी बहुत अच्छे अधिकारी रहे होंगे ? क्या कंपनियों में संविदा कर्मचारियों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है ? क्या अधिकारियों का व्यवहार कर्मचारियों के प्रति अच्छा होता है ? क्या यह घटना कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच संवाद की कमी, नफरत और एक दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति पनपने को नहीं दर्शा रही है ? मुठभेड़ के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के पैरों में गोली लगी है। पुलिस का कहना है कि उसको नौकरी निकालने और ब्लैकलिस्ट करने की वजह से उसने दोनों अधिकारियों को गोली मारी है।
इस घटना में बड़ा प्रश्न यह उठता है कि आखिर इस कर्मचारी को निकालना ही अंतिम निर्णय था। क्या इसको जायज तरीके से निकाला गया था ? क्या इस कर्मचारी के प्रति इन अधिकारियों का रवैया ठीक था ? क्या इन कर्मचारियों को जिला प्रशासन से न्याय मिला ? बताया जा रहा है कि गलत गतिविधियों के चलते अजय प्रताप को नौकरी से निकाल दिया गया था।
दरअसल दातागंज तहसील के गांव सैजनी स्थित एचपीसीएल प्लांट के पूर्व कर्मचारी ने भीतर घुसकर प्रबंधक और उप प्रबंधक को दिन दहाड़े गोली मार दी। मौके पर अफरा तफरी मच गई। घायल अधिकारियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
मूसाझाग थाना क्षेत्र में डहरपुर कलां और म्याऊं मार्ग स्थित गांव सैंजनी में एचपीसीएल का प्लांट लगा है। नोएडा के सिल्वर एस्टेट अपार्टमेंट के ब्लॉक दो निवासी सुधीर गुप्ता (57) प्लांट पर प्रबंधक और जिला पीलीभीत के थाना पूरनपुर के वार्ड तीन के मोहल्ला साहूकारा निवासी हर्षित मिश्रा (32) प्लांट पर उप प्रबंधक पद पर तैनात थे। आउटसोर्सिंग भर्ती को लेकर उनका कुछ दिनों से गांव सैंजनी निवासी अजय प्रताप सिंह से विवाद चल रहा था। सुधीर गुप्ता ने अजय प्रताप सिंह पर रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
अजय प्रताप गुरुवार दोपहर लगभग दो बजे प्लांट के भीतर पहुंचा। कार्यालय में बैठक कर रहे दोनों अधिकारियों को गोली मार दी। अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिन्हें तुरंत सीएचसी ले जाया गया। चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। वहीं प्लांट पर लगभग एक घंटे तक भय का माहौल रहा। बताया जा रहा है कि आरोपी कुछ समय पहले तक प्लांट पर पेलोडर का काम करता था। गलत गतिविधियों के चलते उसे निकाल दिया गया था।








