हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही मोदी सरकार
आज जिस नाजुक मोड़ से देश गुजर रहा है ऐसे में समाजवाद के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के दो नारे याद आ रहे हैं। लोहिया ने कहा था कि जब सड़कें सुनसान हो जाती हैं तो संसद आवारा हो जाती है। जिंदा कौमे पांच साल तक इन्तजार नहीं करती। आज की तारीख में सड़कें सुनसान हैं तो संसद आवारा हो चुकी है। लोगों में देश और समाज के लिए लड़ने का जज्बा कम देखा जा रहा है और विपक्ष कमजोर साबित हो रहा है। जब देशभर में विपक्ष के दलों को सड़कों पर उतर जाना चाहिए था तब अधिकतर नेता पोस्ट और बयानबाजी तक सिमटे हुए हैं। दरअसल किस भी बदलाव में मीडिया और विपक्ष मुख्य भूमिका निभाता है पर मोदी सरकार के सामने विपक्ष और मीडिया दोनों ही अपने कर्तव्य से भटके नजर आ रहे हैं। कांग्रेस तो कुछ मोर्चे पर लड़ती हुई दिखाई दे रही है पर क्षेत्रीय दल तो जातीय आंकड़ों में ही उलझे हुए हैं। जमीनी हकीकत यह है कि मोदी सरकार देश और विदेश दोनों जगह विफल साबित हुई है। देश में तो लोगों को न तो शुद्ध हवा उपलब्ध करा पा रही और न ही शुद्ध पानी। न ही महंगाई पर अंकुश लगा पा रही है और न ही बेरोजगारी कम कर पा रही है। किसानों और मजदूरों को बर्बाद करने के लिए अमेरिका से ट्रेड डील में भारत का कृषि बाजार अलग से खोल दिया गया।






