यूजीसी पर बिगड़ सकता है प. उत्तर प्रदेश का माहौल, आपने सामने आ सकते हैं राजपूत और दलित!

चरण सिंह

 

यूजीसी पर भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद और किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह आमने सामने आ गए हैं। आगरा में आज़ाद समाज पार्टी की ओर से आयोजित हुई संविधान अधिकार बचाओ भाईचारा बनाओ रैली में चंद्रशेखर आज़ाद ने ऐलान किया कि यदि मुट्ठीभर लोगों के विरोध पर यूजीसी एक्ट वापस हुआ तो वह बड़ा आंदोलन करेंगे।इधर चंद्रशेखर आज़ाद के बयान पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ठाकुर पूरन सिंह ने कहा कि एक नेता यूजीसी एक्ट वापस होने पर सड़कों पर उतरने की बात कर रहा है। हम लोग यूजीसी एक्ट के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। सहारनपुर से दिल्ली तक सवर्ण अधिकार यात्रा निकाली जाएगी। ऐसे में प्रश्न उठता है कि सहारनपुर में 2017 में जो राजपूत दलित तनाव देखने को मिला था। उसी तरह का तनाव यूजीसी एक्ट पर हो रहे आंदोलन पर भी हो सकता है। यदि सहारनपुर ठाकुर पूरन सिंह की अगुआई में रैली हुई और यहां से सवर्ण अधिकार यात्रा निकाली गई तो दलित इसे अपने लिए चुनौती मां सकते हैं। वैसे भी 2017 में सहारनपुर में दलित और राजपूत टकराव हो चुका है। तब चंद्रशेखर आज़ाद ने भीम आर्मी बनाकर राजपूतों के वर्स्चव को चुनौती दी टी। 2017 में शब्बीरपुर हिंसा के बाद राजपूत वर्चस्व को चुनौती देने के चलते यह संघर्ष बढ़ा था। उस संघर्ष में अंबेडकरवादी विचारधारा का प्रसार और आत्मसम्मान के मुद्दे प्रमुख थे।शब्बीरपुर हिंसा के मामले की जड़ में राजपूत समुदाय द्वारा महाराणा प्रताप जयंती पर जुलूस निकालने और दलितों द्वारा इसका विरोध करना, जिसके बाद दलित बस्ती में आगजनी की घटना हुई। द ग्रेट चमार का बोर्ड: घड़कौली गांव में दलित युवाओं द्वारा ‘द ग्रेट चमार’ का बोर्ड लगाने और राजपूतों द्वारा उस पर आपत्ति जताने से तनाव पैदा हुआ।
भीम आर्मी का उदय : चंद्रशेखर ने भीम आर्मी के माध्यम से दलितों को शिक्षा और आत्मरक्षा के लिए प्रेरित किया, जिसे राजपूतों ने अपने अम्बेडकरवादी विचारधारा: चंद्रशेखर ने ब्राह्मणवाद और जातिवाद के विनाश का आह्वान किया, जिसे राजपूत समाज ने अपने प्रभुत्व के लिए चुनौती माना था।

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