मुख्य कार्रवाइयाँ
हाजीपुर/सलेमपुर सालार गांव में मदीना मस्जिद को मस्जिद कमेटी और स्थानीय लोगों ने खुद ही रातभर हथौड़े-छेनी से तोड़ दिया, क्योंकि प्रशासन की कार्रवाई तय थी। सुबह प्रशासन ने मलबा हटाया।
इसी इलाके में एक मदरसे (लगभग 1500-2500 वर्ग मीटर पर बना) पर बुलडोजर चलाया गया, जहाँ मदरसे की आड़ में व्यावसायिक गतिविधियां (दुकानें) चल रही थीं।
राया बुजुर्ग गांव में गौसुल बड़ा मस्जिद (552 वर्ग मीटर पर बनी) को प्रशासन ने ध्वस्त किया।
इन कार्रवाइयों से करीब 2.5 बीघा सरकारी जमीन मुक्त हुई, जिसे गरीबों को पट्टे पर देने की प्रक्रिया शुरू की गई।
ये निर्माण सरकारी/ग्राम समाज की जमीन या तालाब की भूमि पर अवैध बताए गए थे। नोटिस दिए गए थे, कुछ मामलों में हाईकोर्ट तक अपील हुई लेकिन खारिज हो गई।
“एक्शन पार्ट-2” का कड़क प्लान
बुलडोजर कार्रवाई के बाद प्रशासन ने “एक्शन पार्ट-2” शुरू किया है, जिसमें अवैध कब्जाधारियों पर आर्थिक शिकंजा कसा जा रहा है:
संबंधित मस्जिदों, मदरसों, मैरिज हॉल और मकानों के कब्जाधारियों पर कुल 75 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है।
जुर्माना वसूला जाएगा, और अगर भुगतान नहीं हुआ तो संपत्ति कुर्की की कार्रवाई होगी।
प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर कब्जा कानूनन अपराध है और अब किसी को ढील नहीं दी जाएगी।
ये कार्रवाइयाँ अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा हैं। कुछ रिपोर्ट्स में इसे संभल में पहले हुई घटनाओं (जैसे शाही जामा मस्जिद सर्वे से जुड़ी हिंसा) के बाद की सख्ती से जोड़ा गया है, लेकिन आधिकारिक तौर पर ये अवैध कब्जे हटाने की सामान्य प्रक्रिया बताई जा रही है।








