इब्राहिम भोलू: कराची अंडरवर्ल्ड का वो कसाई, जिसका अफ्रीका तक फैला था साम्राज्य

कराची की तंग गलियों से निकलकर इब्राहिम भोलू, जिसे हाजी इब्राहिम भोलू के नाम से जाना जाता था, पाकिस्तानी अंडरवर्ल्ड का एक ऐसा नाम बन गया, जिसका जिक्र आज भी डर पैदा करता है। पटनी मोहल्ले के एक कसाई परिवार में जन्मे भोलू को “कसाई” का खिताब मिला, क्योंकि वह न सिर्फ जानवरों को काटता था, बल्कि दुश्मनों को भी बेरहमी से खत्म करने के लिए कुख्यात था। अनपढ़ (अंगूठा-छाप) होने के बावजूद, वह बेहद चालाक और तेज दिमाग वाला था। उसके चचेरे भाई एमक्यूएम के नेता फ़ारूक़ पटनी थे, जो उसके शुरुआती दिनों में राजनीतिक कनेक्शन प्रदान करते थे। लेकिन भोलू की असली ताकत राजनीति से नहीं, अपराध की दुनिया से आई।

 

छात्र राजनीति से हिंसक उदय

 

1990 के दशक में भोलू पीपुल्स स्टूडेंट्स फेडरेशन (पीएसएफ) से जुड़ा, जो पीपुल्स पार्टी का छात्र संगठन था। वह इसके सशस्त्र धड़े का हिस्सा बना और उर्दू आर्ट्स कॉलेज में शाहनवाज़ शानी जैसे नेताओं के साथ काम किया। उस दौर में कराची में चुनावी हिंसा चरम पर थी—हथियारबंद झड़पें और बाहुबल की राजनीति आम थी। भोलू ने छात्र नेता के रूप में उभरते हुए हिंसा को अपना हथियार बनाया। जुनैद मसूद के मुताबिक, “भोलू पर शुरू में पीएसएफ के किसी नेता ने कोई ध्यान ही नहीं दिया… वह बाहुबली था।” 1990 तक वह पीएसएफ से जुड़ा रहा, फिर मृत्यु भुट्टो के ‘अल-ज़ुल्फ़िक़ार’ संगठन से जुड़ गया, जो आतंकवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता था।
1989 में लेखक जाफ़र रिज़वी की भोलू से पहली (और आखिरी) मुलाकात हिंसक साबित हुई। एनएसएफ और पीएसएफ के बीच तनाव के दौरान भोलू ने बंदूक तानकर कहा, “बैज उतार…” और हमला बोल दिया। रिज़वी ने कैंची से बचाव किया, लेकिन घायल हो गए। यह घटना भोलू की क्रूरता का पहला नमूना थी।

 

निर्वासन और अफ्रीका में अपराधी साम्राज्य का निर्माण

1990 में नजीब अहमद की हत्या (एमक्यूएम पर आरोप) के बाद पीएसएफ पर दबाव बढ़ा। भेनज़ीर भुट्टो की सरकार बर्खास्त होने के बाद भोलू को भागना पड़ा। वह मोज़ाम्बिक पहुंचा, जहां रेस कोर्स के राना साहब ने शरण दी। एक मेमन सेठ ने उसके गिरोह को स्थापित करने में मदद की। मापूतो में भोलू ने मंज़र अब्बास जाफ़री के साथ मिलकर अपराधी साम्राज्य खड़ा किया—ड्रग्स, शराब, जुआ, नकली करेंसी, सट्टा, हफ्ता वसूली, हुंडी, हवाला, स्मगलिंग, हत्या और लूट। उन्होंने स्थानीय अफ्रीकी गिरोहों को कुचल दिया और दक्षिण अफ्रीका तक नेटवर्क फैला दिया।
भोलू का अफ्रीकी साम्राज्य इतना मजबूत था कि स्थानीय माफिया उसके नाम से थर-थर कांपता था। पीएसएफ के पूर्व सदस्यों के अनुसार, भोलू-मंज़र गैंग ने मोज़ाम्बिक के राष्ट्रपति चुनाव की फंडिंग तक की—अंडरवर्ल्ड की कमाई से। भोलू ने मेमन सेठ की बेटी से शादी की और दो बच्चे पैदा किए। एमक्यूएम के सदस्यों को अफ्रीका में निशाना बनाया जाता था; उनकी पासपोर्ट की जानकारी कराची से फैक्स की जाती थी। राव अनवार कहते हैं, “भोलू ने ऐसे कई मौक़ों पर हमारी बहुत मदद की… वह देश प्रेम में ऐसा कर रहा था।”

 

दुबई, दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन कनेक्शन

 

दुबई पहुंचकर भोलू ने दाऊद इब्राहिम से हाथ मिलाया। दाऊद उसे “हाजी साहब” कहते थे। दक्षिण अफ्रीका में दाऊद के धंधे संभाले, जिससे गैंगवार भड़कीं। 2000 में बैंकॉक में छोटा राजन की हत्या की सुपारी ली गई। 14 सितंबर 2000 को हमला हुआ, लेकिन राजन बच गए। इस असफलता से शोएब खान से मतभेद हो गए।

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