हर बदलाव में अहम भूमिका निभाने वाले जीजी पारिख!

चरण सिंह 

जो शख्सियत 90 साल के समाजवादी आंदोलन की गवाह रही हो। जिस शख्सियत ने हर समाजवादी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की हो। 100 साल देश और समाज की सेवा में झोंक दिए हों। उस शख्सियत के बारे में लिखा बहुत मुश्किल है। फिर भी प्रयास कर रहा हूं। आज के दौर में जब कितने समाजवादी सत्ता के लिए भटक गए। संसाधनों की ओर भागने लगे। ऐसे दौर में जीजी पारिख अपने उसूलों पर चलते हुए समाजवादियों के लिए प्ररेणा का स्रोत बनते रहे।  जिंदगी का सैकड़ा उन्होंने त्याग बलिदान और सादगी के साथ लगाया।
डॉ. गुणवंतराय गणपतलाल पारिख जो जीजी पारीख के नाम से जाने जाते थे, समाजवादी आंदोलन के पहले समाजवादी पुरोधा रहे हैं जिन्होंने हर बदलाव में अहम भूमिका निभाई। 40 के दशक में अंग्रेजी हुकूमत से टकराए तो 70 के दशक में इमरजेंसी के खिलाफ ताल ठोकी और 80 के दशक में वीपी सिंह, चंद्रशेखर सिंह की अगुआई में हुए आंदोलन में अहम भूमिका निभाई।
17 साल की उम्र में पहली बार जेल जाने जाने वाले जीजी पारीख जिंदगी भर देश और समाज के लिए लड़ते रहे। जीजी पारीख के जीवन पर गांधी जी के बाद सबसे अधिक असर युसूफ मेहर अली के प्रभाव का रहा।
जीजी पारिख आल इंडिया कांग्रेस कमिटी की बैठक के समय नौ अगस्त 1942 को कस्तूरबा गांधी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में भी शामिल रहे और अरुणा आसफ अली के ग्वालिया टैंक में झंडा फहराने के दौरान भी मौजूद रहे। मतलब अगस्त क्रांति के नायकों में जीजी पारिख भी थे।
30 दिसंबर 1924 को जन्में जीजी पारिख एक सच्चे गांधीवादी, महान स्वतंत्रता सेनानी व पर्यावरण के प्रति बहुत चिंतित रहे वाले समाजवादी पुरोधा थे। जीजी पारिख अपने पीछे समाज कल्याण की एक समृद्ध विरासत छोड़कर गए हैं। ऐसी जानकारी मिलती है कि जिंदगी का सैकड़ा मारने वाले जीजी पारिख शुरुआती दिनों में साम्यवाद से प्रभावित थे पर जल्द ही उनका उस विचारधारा से मोहभंग हो गया। उन्होंने यह समझ लिया था कि गांधीवादी विचारधारा ही देश के लिए सबसे अधिक उपयुक्त है।
जीजी पारिख ने न केवल गांधी जी के आदर्शाें को अपने जीवन में अपनाया और बल्कि जिंदगी भर उसका पालन भी किया। पनवेल के तारा में युसूफ मेहर अली केंद्र की स्थापना कर उन्होंने ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया। उनका अभियान कितना बड़ा था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह केंद्र उन्नत खेती के साथ ही अस्पताल, स्कूल और बालिका छात्रावास का संचालन भी करता है। जीजी पारीख ने देश के नौ  राज्यों में आदिवासी स्कूलों और अन्य संस्थानों की बड़ी विरासत छोड़ी है।

ऐसी महान समाजवादी शख्सियत को नमन। 

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