अमिताभ कांत की टिप्पणी : दिल्ली के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना

हाल ही में दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति भयावह हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, मंगलवार दोपहर 1 बजे दिल्ली का समग्र AQI 357 तक पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। शहर के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 36 ‘रेड जोन’ (गंभीर) में हैं, और कई जगहों पर AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया है। इस जहरीली हवा ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है, जहां सांस लेने की समस्या, आंखों में जलन और श्वसन रोग बढ़ने की आशंका है।

 

अमिताभ कांत का पूरा बयान

 

G20 शेरपा और पूर्व नीति आयोग CEO अमिताभ कांत ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा:
“दिल्ली की हवा बेहद खराब स्थिति में है। अब केवल कठोर और निरंतर कार्रवाई ही राजधानी को स्वास्थ्य व पर्यावरणीय आपदा से बचा सकती है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे फोड़ने के अधिकार को जीने और सांस लेने के अधिकार से ऊपर रखा है। दिल्ली के 38 में से 36 मॉनिटरिंग स्टेशन रेड जोन में हैं, कई जगहों पर AQI 400 के ऊपर है। अगर लॉस एंजेलिस, बीजिंग और लंदन प्रदूषण पर काबू पा सकते हैं तो दिल्ली क्यों नहीं।”
कांत ने एकीकृत एक्शन प्लान की मांग की, जिसमें शामिल हैं:

पराली जलाने, थर्मल प्लांट्स और ईंट भट्ठों पर सख्त नियंत्रण।
2030 तक सभी वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलना।
निर्माण कार्यों पर कड़ी निगरानी।
शहर को हरित, पैदल चलने योग्य और सार्वजनिक परिवहन-केंद्रित बनाना।

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्या था?

 

इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने ‘ग्रीन पटाखों’ के इस्तेमाल की सीमित अनुमति दी थी। कोर्ट का तर्क था कि यह फैसला त्योहार की भावना को बनाए रखते हुए पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने का संतुलित कदम है। हालांकि, पटाखों के फोड़ने का समय केवल सुबह 6-7 बजे और रात 8-10 बजे तक सीमित रखा गया था। लेकिन दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में आधी रात तक पटाखों का धमाल चला, जिससे नियमों का व्यापक उल्लंघन हुआ। कांत समेत कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले ने प्रदूषण को बढ़ावा दिया।
यह टिप्पणी वायरल हो रही है और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ रही है, जहां एक ओर त्योहार की परंपराओं का समर्थन है तो दूसरी ओर स्वास्थ्य व पर्यावरण की प्राथमिकता। यदि प्रदूषण इसी तरह बढ़ा तो GRAP (Graded Response Action Plan) के तहत और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे निर्माण कार्यों पर रोक और वाहनों की पाबंदी।

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