नेपाल में चल रहे हालिया राजनीतिक संकट को दर्शाता है, जो Gen Z (युवा पीढ़ी) के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा है। यह घटना 8 सितंबर 2025 को तेजी से विकसित हुई, जब युवाओं ने सरकार के सोशल मीडिया प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन किए। नीचे मैं इसकी पूरी जानकारी दे रहा हूं, जो हालिया समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया अपडेट्स पर आधारित है। ध्यान दें कि स्थिति तेजी से बदल रही है, और 9 सितंबर तक के अपडेट्स के अनुसार, सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।
क्यों भड़का Gen Z का गुस्सा?
नेपाल सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे टिकटॉक, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर सख्त प्रतिबंध लगाया, जिसे युवा वर्ग ने अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसमें सरकारी फंड्स का दुरुपयोग और युवाओं के रोजगार के अवसरों पर असर शामिल है।
Gen Z (जन्म 1997-2012 के बीच) ने इसे “डिजिटल तानाशाही” करार दिया और काठमांडू सहित प्रमुख शहरों में विरोध मार्च निकाले। प्रदर्शनकारी संसद भवन तक पहुंच गए और तोड़फोड़ की।
कानून मंत्री के घर पर हमला
विरोध प्रदर्शनों के दौरान, भड़के युवाओं ने कानून मंत्री (या कुछ स्रोतों में गृह मंत्री रमेश लेखक के आवास को निशाना बनाया)। रिपोर्ट्स के अनुसार, आगजनी की कोशिश की गई, हालांकि पूर्ण रूप से “फूंका” (जलाया) जाने की पुष्टि नहीं हुई है – यह हिंसक झड़पों का हिस्सा था।
पुलिस और सेना ने “शूट-एट-साइट” आदेश जारी कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप 19 प्रदर्शनकारी मारे गए और 400 से अधिक घायल हुए। यह नेपाल के हाल के इतिहास में सबसे हिंसक घटनाओं में से एक है।
ओली सरकार पर संकट: इस्तीफे और दबाव
गृह मंत्री रमेश लेखक का इस्तीफा: 8 सितंबर को, गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री ओली को पत्र लिखकर कहा कि हिंसा की जिम्मेदारी उनकी है। यह इस्तीफा विरोधियों की मांग के बाद आया, जो पहले से ही वीजा घोटाले के कारण संसद में हंगामा कर रहे थे।
9 मंत्रियों के इस्तीफे?: आपका शीर्षक 9 मंत्रियों के इस्तीफे का जिक्र करता है, लेकिन उपलब्ध अपडेट्स में केवल गृह मंत्री का ही पुष्ट इस्तीफा सामने आया है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स और अनौपचारिक रिपोर्ट्स में अन्य मंत्रियों (जैसे शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी) पर दबाव का उल्लेख है, जो सोशल मीडिया बैन के पक्षधर थे। विपक्षी दल ने 8-10 मंत्रियों के सामूहिक इस्तीफे की मांग की है, लेकिन 9 सितंबर तक केवल 1 ही कन्फर्म है। सरकार सोशल मीडिया प्रतिबंध वापस लेने पर विचार कर रही है, लेकिन ओली के पद पर सवाल उठ रहे हैं।
ओली सरकार पहले से ही अस्थिर है: संसद में अवरोध, राजावादी समूहों की आगजनी (जैसे ड्रग ब्यूरो ऑफिस पर हमला), और छात्र संघों के विरोध ने स्थिति बिगाड़ दी।
वर्तमान स्थिति (9 सितंबर 2025 तक)
सेना तैनात: काठमांडू में कर्फ्यू जैसी स्थिति, इंटरनेट सेवाएं बाधित।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: भारत और चीन जैसे पड़ोसी देश चिंतित, संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा की निंदा की।
युवाओं की मांग: सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाना, ओली का इस्तीफा, और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई। प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन सरकार ने बातचीत का प्रस्ताव दिया है।
तुलना अन्य देशों से: यह केन्या के Gen Z विरोध (2025 में राज्य भवन पर कब्जे की धमकी) से प्रेरित लगता है, जहां युवाओं ने सरकार को घेरा







